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Showing posts from March, 2020

ईल्ल ०

मेरे कई प्रिय मित्रो के जोर देने पर बड़े षणयंत्रकारी संगठन समूह इल्लुमिनाती की प्रस्तावना लिख रहा हूँ ये मेरी 4 साल पुरानी पोस्ट है। मित्रो आपको विश्वास नही होगा वर्तमान समय में इल्लुमिनाति के नियंत्रण में सम्पूर्ण विश्व किसी न किसी प्रकार से है ईसके गुप्त रहस्य को उजागर करने वाले अधिकतर लोगो की हत्या की जा चुकी है या फिर उनको गुमनामी की ज़िन्दगी जीने पर मजबूर कर दिया गया। तो सबसे पहले जानिए की इल्लुमिनाती है क्या? #ILLUMINATI अर्थात सबसे अधिक प्रबुद्ध या सबसे अधिक बुद्धिमान लोगों का समूह। मेरे इतने दिन इसके षणयंत्रो को लिखने के बाद भी बहुत से मित्रो को अभी भी नहीं पता होगा की आखिर ये इल्लुमिनाती क्या बला है?? तो जान लो इल्लुमिनाती दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगो का एक सीक्रेट संगठन है जो की पूरी दुनिया पर कब्ज़ा करके अपनी मायावी दुनिया के जंजाल में फंसाकर मनुष्यो को गुलाम बनाना चाहता है। इसका सबसे मुख्य उद्देश्य है पूरी दुनिया में बिना किसी बॉर्डर के सभी देशो में एक मुद्रा एक संस्कृति, एक सभ्यता,एक जाति विशेष का एकछत्र साम्राज्य हो जैसे पहले सनातन धर्म की संस्कृति थी। इसके ल...

ईल्लु १

इल्लुमिनाति का भारत में शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र! भाग-1 मित्रो कभी ध्यान दिया होगा आपने भारत के प्राचीन ग्रंथों में पृथ्वी के निर्माण,प्राणियों,वनस्पतियों के निर्माण, दुनिया के विभिन्न नदियों,समुद्रों,पर्वतों का वर्णन दिया हुआ है और प्रथम मानव सप्तऋषियों से लेकर कलियुग तक का स्पष्ट वर्णन है। किंतु आश्चर्य है कि आजाद भारत में प्रथम शिक्षामंत्री एक मुस्लिम को बनाया गया जिसको इतिहास,शिक्षा पद्धति का कोई ज्ञान नहीं था वही पंडित रविशंकर शुक्ल जैसे अनेक हिन्दू विद्वान को बिल्कुल दूर रखा गया और जवाहरलाल नेहरू द्वारा जर्मन मैक्समूलर की किताबो पर आधारित डिस्कवरी आफ इंडिया किताब लिखी गई जो की पूरी तरह गप्प से भरपूर है उसमे आर्यो को घोड़े पर चढ़कर भारत आना बताया गया और यही इतिहास भारत के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जा रहा है। क्योंकि इल्लु की सारी संस्थाए यही चाहती थी कि भारत की नई पीढ़ी पूरी तरह यूरोपीय प्रणाली को पढ़े और स्वयं को नीच अविकसित समझे और गोरों को प्रतिभाशाली आज 70 वर्षो में इल्लुमिनाती का ये उद्देश्य पूरा होता दिखाई दे रहा है। वास्तव में मौलाना अबुल कलाम तो एक मोहरा था असल में नीत...

ईल्लु २

इल्लुमिनाति का भारत में शिक्षा व्यवस्था पर षडयंत्र भाग-2 कक्षा 10 जीव विज्ञान चैप्टर 8 में यौन शिक्षा! मित्रो शायद 1985 में स्कूलों में 11वि कक्षा के बाद 12 वि कक्षा को जोड़ा गया था इससे पहले केवल 11वि तक ही स्कूली पाठ्यक्रम होता था जिसमे कक्षा 9 से विज्ञान या आर्ट्स या कॉमर्स विषय चुनने पड़ते थे 12वि कक्षा होने के बाद विषय चुनने का कार्य 11वि से होने लगा। फिर 1985 में ही कक्षा 10 में स्वास्थ्य जानकारी के नाम पर यौन शिक्षा का एक अध्याय,जीव विज्ञान विषय में चैप्टर 8 में पढ़ाया जाने लगा जिसमे महिला,पुरुष के गुप्त अंगो का सचित्र विवरण है। अब सवाल ये है कि इसके सचित्र वर्णन के लिए कक्षा 10 ही क्यों चुनी गई ? वैसे आप हमेशा देखते हैं की जैसे हमारे भारत देश में केवल सेटेलाइट के विषय में ही शोध होते है जबकि यूरोप के वैज्ञानिक ,मनुष्य की प्रतिदिन की प्रत्येक गतिविधि पर रिसर्च करते है सुबह जागने से लेकर सोने तक और सोने के बाद भी! तो यूरोप के वैज्ञानिकों ने रिसर्च की और पाया कि 15-16 वर्ष की उम्र लड़के लड़कियों में अत्यंत संवेदनशीलता होती है जिज्ञासु प्रवृत्ति होती है शारीरिक परिवर्तन ह...

ईल्लु ३

इल्लुमिनाती का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षणयंत्र! भाग-3 मित्रो भारत की स्कूली शिक्षा पहले 11वी तक थी तो 9वी में विशेष विषय हिन्दू विद्यार्थी चुनता था लेकिन अब ये कार्य 11वी में होता है 11वि में जो लोग जीव विज्ञान विषय लेते है उनको मेंढक चीरना पड़ता है प्रेक्टिकल के रूप में। ऐसा क्यों?? सीधी बात है 11,12 कक्षा का जीव विज्ञान का हर विद्यार्थी डाक्टर नही बन सकता है क्योकि 1 लाख विद्यार्थी PMT परिक्षा में बैठते तो सेलेक्ट केवल 228 होते है क्योंकि मेडिकल कालेज में सीट ही इतनी होती है! अब ज़िंदा मेंढक सभी से चिरवाना क्या हर जीव विज्ञान के विद्यार्थी को अनिवार्य है 11वी,12 वी में?? षड्यंत्र क्या है इसके पीछे देखिए! ये स्पष्ट बात है कि भारत में ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र इन चार वर्णो में 1947 में ब्राह्मण,वैश्य का मांसाहारी होना असम्भव जैसा था। ये भी आवश्यक नही था कि प्रत्येक क्षत्रिय या प्रत्येक श्रमिक(शूद्र )भी मांसाहार करे। मात्र क्षत्रियो में युद्ध कर पाने,खून खराबा देख पाने की क्षमता विकसित करने हेतु बलि प्रथा एव मांसाहार उनके यहाँ वर्जित नहीं था किंतु अनिवार्य भी नह...

ईल्लु ४

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-4 मित्रो 1947 से 2014 तक मुख्य रूप से देश में कांग्रेस का ही शासन रहा और देश के अधिकांश राज्यो में भी इसी का शासन रहा है। सोचने वाली बात है कि कांग्रेस में हिन्दूवादी पंडित मदन मोहन मालवीय, गोपाल कृष्ण गोखले, पंडित रविशंकर शुक्ल, सुभद्रा कुमारी चौहान, आदि अनेकानेक विद्वान् रहे है और आज भी होंगे फिर भारत का स्कूली कालेज इतिहास 1947 के बाद ही अचानक झूठा कैसे हो गया ? क्यों श्री राम कृष्ण काल्पनिक हो गए? कैसे लुटेरे बालात्कारी मुसलमान शासक महान हो गए? कैसे मंदिरो को तोड़ कर बनार्इ गई मस्जिदो का कोई उल्लेख नही किताबो में? कैसे आर्य यूरोप से आकर भारत में रहने का झूठ पढ़ाया गया? कैसे प्राचीन ऋषियो के नाम,उनके आविष्कार पूरी तरह गायब हो गए किताबो से? कैसे आयुर्वेद का 1 शब्द का उल्लेख भी नही होता किताबो में? जबकी महिला की सिजेरियन पद्धति प्लास्टिक सर्जरी, अँग रिप्लेसमेंट आपरेशन भारत में ऋषि वैद्य करते थे! कैसे भगत सिंह चन्द्र शेखर आजाद गुंडे कहे गए किताबो में??? ये आरोप लगाया जाता है कि वामपंथियो ने गलत स्कूली कालेज अध...

ईल्लु ५

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षणयंत्र। भाग-5 मित्रो केंद्रीय पाठ्यक्रम एवं राज्य सरकार के कक्षा 6 से लेकर कक्षा 10 तक की इतिहास की किताबो में केवल और केवल मुस्लिम लुटेरे शासकों को महान बताने का प्रयत्न किया गया है और अनेक झूठी कहानियां लिखी गई उनको न्यायप्रिय दर्शाते हुए। जबकि आज हम सब देख रहे है कि अरब देशों में शरिया कानून कितना बुरा है और आज के आधुनिक युग में भी लागू है जिसके अत्याचार के समय समय पर उदाहरण देखने को मिलते रहते हैं जैसे मुस्लिम स्त्री के साथ दुष्कर्म होने पर उसे 4 चश्मदीद गवाह लाना काफिरों(हिन्दुओ) को रमजान के महीने या उसके बाद में हत्या करने का आदेश आदि आदि। अब सोचिए आज से 600 वर्ष पहले से 150 साल पहले तक भारत में इस्लामिक आतताई हिन्दुओ को अर्थात काफिरों को किस तरह के दंड देते रहे होंगे किसी अपराध पर? लेकिन ये अत्याचार की कहानियां/इतिहास पूरी तरह गायब! तैमूर लंग ने गढ्ढे में गिरे एक हिन्दू बालक को भाले से छेद कर बाहर निकाला। सिख गुरुओं की चमड़ी नोचवा दी गई थी! उनके बच्चों को उनके सामने चाक़ू से गला काट कर मारा गया था। सिख गुरुओं को खौलते तेल ...

ईल्लु ६

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षणयंत्र भाग-6 मित्रो उत्तर भारत की स्कूली किताबो में दक्षिण भारत के किसी इतिहास,संत,सामाजिक उत्थान के  प्राचीन राजाओ,विशाल मंदिरो का कोई उल्लेख नहीं! ऐसा क्यों? मतलब दक्षिण भारत को उत्तर से अलग करने की पूरी तैयारी 1947 के पहले ही कि जा चुकी थी जो आज तक जारी है। किसके इशारे पर? अब तो देश के अनेक राज्यो में कांग्रेज़ सरकार नही है फिर भी पाठ्यक्रम बिल्कुल भी बदला नहीं किया जा रहा है ऐसा क्यों?? जैन सम्प्रदाय के बारे में स्कूली किताब में सीधे 24 वे तीर्थंकर की चर्चा क्यों? यदि जैन सम्प्रदाय के विषय में बताना है यो प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी के बारे में क्यों नही बताते किताबो में? अगर बता दिया तो जैन को हिन्दू से अलग रखने का राष्ट्रविरोधी शक्तियों का खेल नहीं हो पायेगा पुराणों में वर्णन है भगवान ऋषभदेव इच्छावाकु वंश में जन्म लिए थे जिस वंश में सत्यावादी राजा हरिश्चन्द्र, सम्राट दिलीप,भगवान श्री राम जी ने जन्म लिया था हमारी पिछली पीढ़ी को पता था कि जैन सम्प्रदाय सनातन धर्म का अभिन्न अंग है और पूर्ण रूप से अहिंसा व्रतधारी है। ...

ईल्लु ७

इल्लुमिनाती का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-7 मित्रो यूरोप के वैज्ञानिक मनुष्य के दिमाग पर बहुत रिसर्च करते आ रहे है जिसमे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि 5 से 9 साल के बच्चे में तथ्यों को याद रखने की बहुत अद्भुत क्षमता होती है। अब ध्यान दीजिएगा हमारे प्राचीन ऋषि मुनि लाखो साल पहले इस तथ्य से परिचित थे इसलिये 4 या 6 साल की उम्र में ही बालक को गुरु के अधीन कर दिया जाता था। बचपन में आरंभिक शिक्षा में वेद मन्त्र, अनेकानेक गणितीय, वैज्ञानिक, खगोलिकीय सूत्र मंत्रो, श्लोको के मॉध्यम से रटा दिये जाते थे बाद में उच्च कक्षाओ में इस रटे हुए ज्ञान की मीमांसा,विश्लेषण होता था। अर्थात गुरुकुल पद्धति के अंतर्गत पहले ज्ञान का भंडार बालक के मस्तिष्क में भर दिया जाता था फिर उसके बाद की उच्च कक्षाओ में में उस ज्ञान को processed किया जाता था इसलिये 20 या 25 वर्ष के गुरुकुल के विद्यार्थियों के तेज को देखकर लोग स्वयं सर झुका लेते थे। प्राचीन काल से लेकर शायद वर्ष 1970, 75 तक भारत में स्कूली गाणित की प्राथमिक कक्षाओ में सवैया,अढैया के पहाड़े होते थे यानी आज की भाषा में 1.5, 2.5 का टेबल। ...

ईल्लु ८

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग -8 मित्रो अचानक वर्ष 2013 से भारत के अनेक राज्यो के स्कुल कालेज में एक कार्य होना आरम्भ हुआ जिसकी शुरुआत अखिलेश यादव की सरकार ने सबसे पहले शुरू किया वो है स्कूलों, कालेजो में लैपटॉप, मोबाइल बाटने का सार्वजनिक कार्य एक योजना का नाम देकर। यानी स्कुल के बड़े बच्चे कालेज के प्रथम वर्ष के हर बच्चे को लैपटॉप मोबाइल प्रदान करना! आश्चर्य होता है 30 हजार का लैपटाप 4 हजार का मोबाइल का खर्चा एक विद्यार्थि के ऊपर क्यों ?? ज्ञान किताबे पढ़ने से बढ़ता है या लैपटॉप,मोबाइल से? किताबे क्यों नहीं बाटी हजार रुपये की प्रति विद्यार्थी ?? जबकि भारत देश के ग्रामीण एवं शहरी सरकारी स्कूलों में छोटी कक्षाओ में पढ़ने वाले बच्चे तपती धुप या कड़ाके की ठंड में नँगे पैर स्कुल जाते है कपड़े तक नही होते स्कुल के पहनने के लिये किताबे यदि स्कुल से मिल जाए तो कापियां नही होती लिखने के लिये। फिर लैपटाप, मोबाइल का व्यर्थ खर्च क्यों? और आश्चर्य नही होता कि सपा सरकार, भाजपा सरकार, वामपंथी, कांग्रेज़ , सभी लोग ये कार्य एक जैसा क्यो कर रहे हैं? कारण क्या है ?...

ईल्लु ९

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र! भाग-9 मित्रो प्राचीन भारतीय इतिहास में मानव सभ्यता के विकास के विषय में बताते हुए स्कूली किताबो में लिखा जाता है कि आकाश से बिजली गिरते देखकर, फिर जंगलो में आग लगते देखकर मनुष्य ने आग के विषय में जाना,सीखा, फिर गुफा में आग जलाने लगे! अब आप ये बताये कि बिजली क्या गर्मी के मौसम में कड़कती है जोकि जमीन तक पहुचकर आग लगाएगी या बारिश के मौसम में बिजली कड़कने पर ऐसा आग लगना सम्भव है?? और कितने वीर लोग है जोकि बिजली कड़कने पर उसके पास जाकर बीड़ी जलाते है या लकड़ी जलाकर आग घर तक ले आते है? ये हास्यपद मूर्खतापूर्ण तथ्य मैक्समूलर ने यूरोप में पढ़ाई जाने किताबो के आधार पर भारतीय स्कूलों में लिखवाया लेकिन पंडित रविशंकर शुक्ल, मालवीय जी, गोविन्द बल्लभ पंत जैसे अनेक विद्वानों के होते हुवे भी इस झूठ का विरोध क्यों नही हुआ?? जबकि हमारे ऋग्वेद का प्रथम मन्त्र ही अग्नि देव को समर्पित है और वेद पृथ्वी पर अवतरित हुआ प्रथम ज्ञान का भंडार है ऋग्वेद में यज्ञ संपन्न करने का पूरा विवरण दिया हुआ है अर्थात ना केवल आग बल्कि अनाज, औषधि आदि के विषय में हमारे...

ईल्लु १०

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षणयंत्र भाग-10 कोलंबस ने अमेरिका खोजा! वास्कोडिगामा ने भारत खोजा! क्या ये पढ़ाने की जरुरत है भारत के इतिहास की किताबो में?? कोलंबस समुद्री यात्रा पर निकला क्योंकि उसने भारत के विषय में सुन रखा था अर्थात भारत देश का स्वर्णिम अस्तित्व पहले से था और कोलंबस के देश के लोगो को ये जानकारी थी। किंतु वो समुद्री रास्ता भटक गया और अमेरिका पहुच गया अर्थात भारत तक पहुचाने के समुद्री रास्ते का ज्ञान या नक्शा उसके पास था किंतु किसी तूफ़ान आदि के कारण उसकी नौका गलत दिशा में चली गई। कोलंबस के देश में नक्शा बनाने वाले लोगो ने पहले ही भारत घूम लिया था तभी तो नक्शा बना पाने में सफल हुए थे। अब वास्कोडिगामा! ये समुद्री रास्ते से भारत पहुचने में सफल हुआ ना कि इसने भारत की खोज की वास्तव में ये विजय नगर साम्राज्य के विशाल व्यापारिक जहाज का पीछा करते हुए भारत आया था। तो ये दोनों घटनाएं किस्से अगर किसी दूसरे देश के, विशेषकर यूरोप के स्कूली बच्चे पढ़े तो उचित ही है। किंतु हम भारतीयों के लिये तो ये हास्यास्पद शब्दावली है क्योंकि भारत वर्ष का अस्तित्व तो ...

ईल्लु ११

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-11 मित्रो भारत में 1947 के बाद अंग्रेजी भाषा में लिखित विषय स्कूलों में इस तर्क के साथ आरम्भ किया गया कि यूरोप का समस्त विज्ञान अंग्रेजी में है इसलिये स्कूलों में अंग्रेजी आवश्यक है। क्या ये आश्चर्य की बात नहीं कि 1950 में भारत की 35 करोड़ आबादी में यदि 5 करोड़ स्कूली विद्यार्थी थे तो केवल 3 विषय भौतिक विज्ञान physics,रसायन विज्ञान chemistry,जीव विज्ञान Biology की शायद 40 किताबो को पढ़ाने के लिये 5 करोड़ विद्यार्थियों को अंग्रेजी सिखाने की आवश्यकता क्यो पड़ी? जबकि इन 40 किताबो को हिंदी में एवं अन्य प्रचलित भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता था केवल 40 अनुवादक ही 1 माह मेहनत करते तो 5 करोड़ विद्यार्थीं और आज के 30 करोड़ विद्यार्थी भाषा की परेशानी से बच जाते कि पहले अंग्रेजी सीखो फिर विज्ञान सीखो। साथ ही अब जबकि अंग्रेजी के स्कूल/कालेज गावो तक में खुल चुके है तो विज्ञान, कार्मस ,आर्ट्स आदि की किताब एवं समस्त किताबे अंग्रेजी में हो चुकी है। और अंग्रेजी मॉध्यम में पढ़ने वाला विद्यार्थी जब अंग्रेजी जानने,समझने लगा है और अपने विज्ञान,कॉम...

ईल्लु १२

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-12 सामान्य ज्ञान पर्चा! जब भी हम किसी सरकारी नौकरी के लिये कोई परीक्षा देते है तो एक पर्चा सामान्य ज्ञान का अवश्य होता है। क्यों? क्या ये अवश्यक है?? परमाणु संस्थान,रेलवे,विमान सेवा, विमान निर्माण, खनन विभाग,स्टील उद्योग आदि में कार्य करने हेतु जब इंजिनियर,वैज्ञानिक की परीक्षा होती है तो विज्ञान से सम्बंधित पद के लिये, B.Sc, BE आदि डिग्री की योग्यता निर्धारित की जाती है। जो विद्यार्थी जिनका शैक्षणिक चिंतन उच्च स्तर का है नए अन्वेषण,नए विचारों,नई अभिकल्पनाओ में खोए रहते है जिन्होंने डिग्री में सर्वोत्कृष्ट अंक प्राप्त किये वो ऐसी परिक्षा देने जाते है और सम्भवतः फेल हो जाते है। क्योंकि उनको नही मालुम था कि क्रिकेट में शतक किसने सबसे अधिक बनाये? अकबर कब मरा? पानीपत का तीसरा युद्ध कब हुआ? चीन की दीवार किस राजा ने बनाया? संविधान की किस धारा के अंतर्गत आरक्षण की बात लिखी है? मैंक्सिको की मुख्य फसल क्या है? अब सोचिये ये प्रश्न एक इंजिनियर के कार्य क्षेत्र वैज्ञानिक के कार्य के लिए आवश्यक है क्या??? यदि उपर्युक्त ...

ईल्लु १३

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा पर षड्यंत्र भाग-13 विदेशी फसल मित्रो स्कूलों में और यदा कदा अखबारों में ये प्रायः लिखा रहता है कि आलू पोलैंड से आया टमाटर जापान से गन्ना ब्राजील से भारत आया आदि आदि बस ये एक लाइन लिख कर फिर आगे आलू,टमाटर आदि के गुण, सब्जी बनाने की विधि, व्यंजन, औषधीय उपयोग आदि का वर्णन होता है। लेकिन ये कभी नहीं लिखा रहता कि भारत से कौन लेने गया था या वहां से कौन भारत लेकर आया और कब ?? एक 99% सत्य लेख की आड़ में केवल एक झूठ लिख दिया जाता है जिसको हमारा अवचेतन मस्तिष्क ग्रहण कर लेता है और ये एक तथ्य हमको जीवन भर याद रह जाता है और ऐसे ही 1% प्रतिदिन के झूठ पढ़ते हुए 10 साल का बालक 40 वर्ष की उम्र तक मानसिक गुलाम बन जाता है। जबकि सत्य ये है कि पुराणो में सम्राट पृथु द्वारा कृषि कार्य के विस्तार का प्रसंग आता है अग्निपुराण में हजारो औषधियो एवं अन्न,शक्कर आदि का वर्णन है। निघंटु ग्रंथो में आलू,प्याज,गन्ने,दाल,पालक,घी,दूध, चावल,भिन्डी आदि का औषधीय वर्णन है वो भी संस्कृत भाषा में। महाभारत काल में विदुर जी की पालग साग और द्रौपदी की हांडी के चावल का वर्णन है साथ ही भ...

ईल्लु १४

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-14 कम्प्यूटर मित्रो ज्ञान की वृद्धि विभिन्न किताबो के अध्ययन और चिंतन से होती है किंतु किताबो से अध्य्यन की प्रवृत्त्ति अब विद्यार्थियों में प्रायः समाप्त हो रही है क्योंकि कम्प्यूटर पर गूगल के मॉध्यम से सब कुछ उपलब्ध है। और कम्प्यूटर को कक्षा 6 से सीबीएसई स्कूली पाठ्यक्रम् में सम्मिलित किया गया है क्या स्कूली विद्यार्थियो के लिए ये आवश्यक है?? आपके घर में कूलर,फ्रिज,एसी, बाइक,कार,पानी की मोटर ,ट्यूबलाइट सबकुछ है और ये सब विज्ञान नहीं है बल्कि ये विज्ञान के अंतिम सुविधाजनक उपभोक्ता उत्पाद है। जिसको वर्तमान में consumer product कहते है और consumer इसका end user अंतिम उपयोगकर्ता होता है तो क्या उपर्युक्त प्रतिदिन उपयोग में आने वाले वस्तुओं के विषय में स्कूलो में 6वी से लेकर 10वी तक कुछ भी पढ़ाया जाता है?? उत्तर- नही पढ़ाया जाता! फिर कम्प्यूटर की पढ़ाई, इसके साफ्टवेयर, हार्डवेयर के विषय में कक्षा 6 से पढ़ाना क्यों आरम्भ किया?? क्योंकि 1.जब ये चीजे पाठ्यक्रम में होगी तो विद्यालय में हर कक्षा में कम्प्यूटर रखना होगा जोकि...

ईल्लु १५

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-15 गुरु पूर्णिमा Vs शिक्षक दिवस भारत में हिन्दुओ के विभिन्न पर्व,त्योहारों के विरुद्ध इल्लु छिपे रूप में बहुत परिश्रम कर रहा है ताकि ये त्योहार हमारे परम्पराओ से विलोपित होते जाए या फिर ऐसा प्रचार किया गया मीडिया के मॉध्यम से कि हिन्दू स्वयं अपने त्योहारों का विरोध करे। जैसे होली पर रंग,दिवाली पर पटाखे ,संक्रांति पर पतंग का आदि! इसी प्रकार गुरु पूर्णिमा को हिन्दू (सनातन, जैन,सिख,बौद्ध) अपने गुरुजनों के चरणों में सर नवाते है और इस सर नवाने में प्राचीन ऋषि परम्परा, गुरुकुल परम्परा जीवित हो जाती है शास्त्र जीवित हो जाते है धर्म प्रतिष्ठित हो जाता है जिसका असर शेष 364 दिन तक रहता है। तो गुरु पूर्णिमा का महत्व कम करने के लिये- 1.1991 में केबल टीवी चैनल आरम्भ हुए और वर्ष 2000 तक जब ये गाँव तंक पहुच गये तब 2001 से हिन्दू संतो का टीवी पर निरादर आरम्भ हुआ ध्यान दीजिए केवल उन संतो का निरादर हुआ जो कि हिन्दू धर्म को प्रतिष्ठित करने में लगे रहे। कांग्रेज़ के हित में काम करने वाले या हिन्दुओ को भ्रमित करने वाले चंद्रास्वामी जैसे ढ...

ईल्लु १६

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-16 बीएड, एमएड मित्रो वर्ष 2000 से पहले तक स्कूलों में कार्यरत पढाने वाले शिक्षक को ही बीएड,एमएड करने का प्रावधान था ताकि बच्चों को पाठ सिखाने का सही तरीका, सरल तरीका, उनके मनोविज्ञान को समझने, उनको प्रोत्साहित करने के तरीके सिखाये, समझाए जा सके। वर्ष 2000 के बाद अचानक पूरे देश में बरसाती कुकुरमुत्ते या पान की तरह बीएड कालेज खुल गए और निजी या सरकारी स्कूल में अध्यापन कार्य हेतु ये अनिवार्य योग्यता निर्धारित कर दी गई। क्यों?? अब एक बात स्पष्ट समझ लेना चाहिए कि 1.जिस विद्यार्थी ने कॉलेज मे 90 प्रतिशत से B.Sc या M.Sc किया है वो अधिक बुद्धिमान होगा या जिसने 60% से यही डिग्री+ बीएड किया है वो? वर्तमान मापदंड के अनुसार 60% वाले प्रत्याशी को नौकरी हेतु योग्य माना जाएगा क्योंकि उनके पास B. Ed की डिग्री नही है। क्या ये आश्चर्य की बात नहीं? आखिर इन बीएड और एमएड पाठ्यक्रम का उद्देश्य क्या है ? तो उद्देश्य ये है कि विद्यार्थियों का पैसा व्यर्थ करवाना 2 साल का कीमती समय नष्ट करवाना और सबसे महत्वपूर्ण ये कि योग्य प्रत्याशी...

ईल्लु १७

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-17 स्कूली समय (विद्यालय जाने का समय) भारत देश का विस्तार देशांस (longitude) 68 डिग्री पूर्व से 98 डिग्री पूर्व तक है अर्थात 30 डिग्री का फर्क। 1 डिग्री स्थल को सूर्य के सामने से पार होने में 4 मिनट लगते है अर्थात 30 डिग्री पार होने में 120 मिनट लगेंगे यानी 2 घण्टे। अर्थात अरुणाचल में यदि सूर्योदय सुबह 5.30 पर दिखाई पड़ा तो गुजरात के अंतिम छोर पर सुबह 8 बजे लोगो को सूर्य के दर्शन होंन्गे। इसलिये इस झंझट को दूर करने के लिये मिर्जापुर प्रयागराज से गुजरने वाले देशांश 82 डिग्री को ही आधार माना गया और समय का भारतीय समय IST का निर्धारण इसी से होता है और पूरे देश की घड़ियां इसी से एक साथ चलती है। पर भारत में जहॉ कि कश्मीर का मौसम अलग, मध्यप्रदेश का अलग,हिमाचल का अलग, राजस्थान,चेन्नई का अलग होता है तो क्या केंद्रीय विद्यालय CBSC पैटर्न के स्कूलों का पुरे देश में एक समय पर खुलना बन्द होना न्यायपूर्ण है??? क्या इस पध्दति को स्थानिक समय स्थानिक मौसम के अनुरूप नहीं होना चाहिए? ये परिवर्तन आखिर क्यों नही हुआ? किसी व्यवस्था को...

ईल्लु १८

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-18 आर्थिक सहायता इसे CBSE पाठ्यक्रम केंद्रीय सरकार के कर्मचारियो की सुविधा के लिये आरम्भ किया गया था ताकि दूसरे स्थान दूसरे राज्य में ट्रांसफर होने पर बच्चे को किसी स्कुल के पाठ्यक्रम में दिक्कत ना हो। फिर धीऱे से इस पाठ्यक्रम को मिशनरी स्कूलों ने अपना लिया केंद्रीय विद्यालय के अलावा इन मिशनरी स्कूलों में भी केंद्र के अधिकारी,कर्मचारी अपने बच्चों को भेजने लगे विभिन्न कॉर्यक्रम होने लगे और ये स्कुल लोकप्रिय हुए चमक दमक के कारण जिससे व्यापारी वर्ग भी अपने बच्चों को भेजने लगा। तो अब जब भी केंद्र सरकार का नया वेतनमान आता है तो इन मिशनरी स्कूलों की फीस तिगुनी हो जाती है महंगी फीस के कारण केंद्र के कर्मचारी इन मिशनरी स्कूलों से विमुख ना हो जाए इसके लिए वर्ष 2008 से केंद्र सरकार ने कर्मचारीयो को शिक्षा भत्ता देना आरम्भ किया(कांग्रेस सरकार ने) जोकि वर्तमान में 18 हजार रूपये प्रति स्कुली विद्यार्थी प्रतिवर्ष है यानी 2 बच्चे का 36 हजार रूपये एक कर्मचारी के द्वारा सरकार ने मिशनरी स्कूल को भिजवा दीए। कर्मचारी सोच रहे है कि सरकार उन...

ईल्लु १९

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-19 जैसा कि आज हर हिन्दू को पता होगा भारत के स्कूल और कालेज के पाठ्यक्रम में भारत के सनातन इतिहास को पूरी तरह विलोपित कर दिया गया 1950 से। मोदी सरकार में सन 2014 में स्मृति ईरानी शिक्षा मंत्री बनी अत्यंत तेज तर्रार,बुद्धिमान,त्वरित जवाब देने की तीक्ष्ण बुद्धि,हर टीवी इंटरव्यू में विरोधी पत्रकार की अच्छे से धुलाई करने में क्षमतावान। तो भारत के प्राचीन इतिहास को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने,व्यर्थ पाठ्यक्रम का बोझ हटाने और अच्छी व्यावहारिक उपयोगी शिक्षा देने हेतु ईरानी जी ने विद्वानों का एक पैनल बनाया जोकि स्कूली पाठ्यक्रम की शुद्धि के लिये जून 2014 से काम करने लगा। टीवी पर किसी ना किसी चैनल पर हर 3 माह में उनका इंटरव्यू आता (ऐसा लगता है कि इसके बहाने ,उनके मुह से उनके मंत्रालय के कार्य उगलवाये जाते थे) उन्होंने हर इंटरव्यू में ये बात कही थी की स्कूली पाठ्यक्रम संशोधन का कार्य चल रहा है पत्रकार एवं कांग्रेज़ ने आरोप लगाए कि RSS के लोग इतिहास पाठ्यक्रम निर्धारित करने बिठाये हुए है। लेकिन कार्य पूरा हुआ और 23 जून 2016 क...

ईल्लु २०

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-20 MBA, MCA कोर्स मित्रो भारत देश में शायद 1990 में MBA, MCA पाठ्यक्रम आरम्भ हुआ जो लोग बीएससी, बीई, बीए आदि स्नातक पाठ्यक्रम कर रहे थे या कर चुके थे तो उनको ये नए पाठ्यक्रम समझ में नही आये लेकिन कुछ विद्यार्थियों ने MSc में प्रवेश लिया तो कुछ ने MBA,  MCA कोर्स पसंद किया। उस समय शिवखेड़ा नाम के आदमी को पूरे भारत में मैनेजमेंट गुरु बनाकर प्रचारित किया गया दैनिक भास्कर ने विराट आयोजन किये हर जिला स्तर के शहर में ताकि इन नए डिग्री कोर्सेस का प्रचार हो युवा आकर्षित हो।(और आज इस तथाकातीत मैनेजमेंट गुरु का कोई अता पता नही ये केवल एक मुखौटा था ) आगे इन नये विषयों का भविष्य बिल्कुल स्पष्ट नहीं था कि नौकरी कहाँ और कितने वेतन वाली मिलेगी?? बीएससी के बाद आरंभिक कम्प्यूटर कोर्स करने वालो को मेरे बड़े भाई ने फटी चप्पल पहने देखा था 1989 में फिर 1995 में भारत में अचानक एक आर्थिक अंतराष्ट्रीय विस्फोट होता है और प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव डंकल प्रस्ताव स्वीकार कर लेते है और GATT समझौते पर हस्ताक्षर किये जाते है। WTO का मुख्यालय भारत...

ईल्लु २१

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-21 प्राथमिक पाठ्यक्रम द्वितीय विश्व युद्ध के समय यूरोप में केजी,नर्सरी आदि कक्षाओ का आरम्भ हुआ बच्चों को एकसाथ रखने के लिये क्योंकि हर घर के वयस्क महिला पुरुष को गोला बारूद की फैक्टरी में युद्ध की तैयारी हेतु कार्य करना अनिवार्य था उनके यहां कोई विशिष्ट प्राचीन विकसित शिक्षा प्रणाली थी ही नहीं तो बच्चों को खिलौने देते थे, अक्षर ज्ञान कराते थे,कविताएं, छोटी कहानियां याद कराते थे। 1947 भारत स्वतंत्र हुआ और मौलाना अबुल कलाम जिसको भारत की प्राचीन गुरुकुल पद्धति का कोई ज्ञान ,ऋषियो के ग्रंथो में उपलब्ध गणित,आयुर्वेद, विज्ञान, भूगोल की कोई जानकारी नहीं थी जैसा जियोनिस्टो ने करवाया उसने वैसा ही किया। उस गुलाम को देश का प्रथम शिक्षा मंत्री बनाया गया आश्चर्य है 32 करोड़ धर्मनिष्ठ हिन्दुओ का शिक्षमंत्री मदरसे में पढ़ा एक मौलाना क्यों?? जबकि पंडित रविशंकर जैसे कई विद्वान उपलब्ध थे इस मौलाना ने एवं बाद के सभी  शिक्षा मंत्रियों ने, यूरोप की शिक्षा प्रणाली को ही भारत में लागू किया वहीँ के जैसे पाठ्यक्रम को यहाँ के प्राथमिक कक्षाओ ...

ईल्लु २२

इल्लुमिनाति का शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र! भाग-22 ईसा मसीह और वेलेंटाइन डे मित्रो भारत के स्कूलों में सर्वधर्म सद्भाव के अंतर्गत शिक्षा देने का कार्य 1947 के बाद निश्चित किया गया इसाई मिशनरियो को स्कुल खोलने की अनुमति दी गई निजी स्कूल के रूप में इसाई स्कुल हिन्दू जैन सिख ट्रस्टों द्वारा खोले गए स्कुल ही थे। 1947 में केवल जिला मुख्यालय शहर में स्थित इसाई स्कुल अब वर्तमान में तहसील से लेकर गांव तक पहुच चुके है तो हर इसाई स्कुल के प्रांगण में ईसा मसीह की सफ़ेद वस्त्रों में, कबूतर उड़ाते हुए, एक मूर्ति अवश्य होती है। इन स्कूलों में जाने वाले हिन्दू बच्चे 4 साल की उम्र से ही ईसा मसीह को देखने लगते है और इसाई स्कुल के शिक्षकों को इस मूर्ति के सामने नमन करते देखते है बस यही से बाल मन प्रभावित हो जाता है। एक कहानी हम सब ने पढ़ी है कि बलिष्ठ विशाल युवा हाथी को एक मामूली सांकल से बांध कर रखा जा सकता है क्योंकि बचपन में ही जब वो उस सांकल में बंधा हुआ था तो उस छोटे हाथी ने कई बार सांकल तोड़कर उच्छल कूद करने का प्रयत्न किया किंतु उसकी उम्र की तुलना में सांकल अधिक मजबूत होने के कारण वो तो...

ईल्लु २३

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र! भाग-23 टारगेट वर्ष 2090 मित्रो भारत में 1947 के बाद निजी शिक्षण संस्थान खुले तो हितकारिणी, जैन, सिख ट्रस्ट द्वारा खोले गए और अग्रसेन महाविद्यालय, तीर्थंकर यूनिवर्सिटी , सरस्वती शिशु मंदिर, महर्षि विद्या मंदिर आदि नाम से खोले गए। फिर बाद में सेठ लोग अपने माता पिता के नाम से स्कुल कालेज खोलने लगे जैसे स्व श्री बद्री सिंह जूनियर हाई स्कूल,ईश्वरदीन PG कॉलेज,देवी देवताओ,प्राचीन ऋषियो, माता पिता के नाम पर हिन्दू ( सनातनी,जैन,सिख,बौद्ध ) वर्ग समस्त शैक्षणिक, सामाजिक, धार्मिक कार्य करता है किंतु आपको आश्चर्य नहीं होता कि इसाई स्कुल केवल इसाई मरे हुवे विदेशी पॉप के नाम से ही क्यों खोले जा रहे है? पिछले 100 वर्षों में इस नामकरण पद्धति में बिल्कुल भी बदलाव क्यों नही हुआ ?? एक बात हमेशा ध्यान रखिए कि किसी संस्कृति के विनाश हेतु इल्लु 100 वर्षो की दीर्घकालीन योजना बनाता है फिर उनके वंशज इस योजना पर कार्य करते जाते है तो इल्लु ने पहचाना कि गुरुकुल ही इस देश की भौतिक समृद्धि ,ज्ञान के आधार है तो 1858 से ही गाँव गाँव घूमकर गुरुकुल नष्ट क...

ईल्लु २४

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र! भाग-24 शैक्षणिक सत्र(अवकाश) मित्रो 1947 के बाद भारत में 32 करोड़ हिन्दू और 5 करोड़ मुस्लिम थे और भारतवासियों का मुख्य व्यवसाय और कमाई का साधन कृषि ही था और व्यापार जगत भी इसी कृषि उत्पाद आधारित था उद्योग आधारित नहीं। तो जुलाई में स्कूल खुलते हैं पूरे भारत में मार्च तक परीक्षाएं होती हैं! फिर गेहू की फसल कटने के बाद घरों में शादियां होती थी सभी सम्बन्धी जन मामा,चाचा, फूफा,जीजा,मौसी आदि घर में विवाह कार्यक्रम में एकत्रित होते थे पारिवारिक सम्बन्ध प्रगाढ़ होते थे छोटे बच्चों को सभी सम्बन्धियो से स्नेह मिलता था जो कि सभी के लिये हितकारी होता था भविष्य में। पूरे देश में जुलाई से अप्रैल तक का सत्र लगता था और 2 माह बच्चे पूरी तरह मानसिक रूप से स्वस्थ मुक्त रहते थे और ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी के पहले विवाह कार्य निपट जाते थे। पर पता नही ये सामाजिक,पारिवारिक सद्भाव किस हिन्दू विरोधी को पसंद नही आया और शिक्षा सत्र अप्रैल से आरम्भ हुआ और भारतीय हिन्दू पारिवारिक कार्य पूरी तरह बिखर गए और अब लोग केवल 2 दिन की छुट्टी ही लेकर आ पाते है क...

ईल्लु २५

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-25 टॉफी बांटो मित्रो आप यदि जागरूक है तो बच्चों के लिये वर्षो पहले और आज भी टॉफी नहीं खरीदते होंगे किंतु बच्चों में टॉफी बाजार में टॉफी सामने क्यों रखी और इतनी बिक्री कैसे? जियोनिस्ट आकाओं के इशारे पर मिशनरी,इसाई उद्योग, व्यापार, विज्ञापन सब एक साथ जुड़े हुए होते है तो भारत में शुभ अवसरों पर मिठाई खाने खिलाने का प्रचलन रहा है सरकारी स्कूलों एवम अन्य स्कूलों,संस्थाओं में, 15 अगस्त, 26 जनवरी एवम अन्य अवसरों पर मिठाई, बूंदी के लड्डू ,नमकीन आदि बांटे जाते रहे है। अब भारतीय बच्चों में टॉफी कैसे लोकप्रिय हो इसके लिए इसाई स्कूलों एवम जहॉ जहॉ इसाई प्रिंसिपल आदि रहे है वहां स्कुली बच्चों का जन्मदिन स्कुल में ही मनाने को प्रोत्साहित किया गया और इसके लिये बच्चों को टॉफी बाटने की प्रेरणा दी गई तो कुछ बच्चों ने ये आरम्भ किया और कुछ वर्ष बीतने पर ये एक परम्परा बन गई स्कूलों में और भारतीय लोगो की गुलामी मानसिकता ये है कि महाजनों येन गता सा पन्था। अर्थात-बड़े लोग,समृद्ध लोग,जिस दिशा में चले वही अच्छा रास्ता है। तो अन्य स्कूलों में भ...

ईल्लु २६

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र! भाग-26 स्कूल में छोटे ड्रेस और मॉडलिंग मित्रो आजादी के पहले और फिर बाद में भारतीय स्कूलों में यूनिफार्म का कोई विशेष नियम नहीं था उस समय चर्च के स्कूलों में ही विशेष यूनिफार्म होती थी। भारतीय सरकारी स्कूलों में फिर यूनिफार्म निश्चित हुई अभी भी राज्य सरकार के सरकारी स्कूलों में लड़कों को फुलपैंट शर्ट और लड़कियां सलवार सूट पहनकर जाती है तो चर्च सिस्टम से चलने वाले स्कूलों ने लड़कियों के लिये स्कर्ट निर्धारित किया सम्भवतः 1990 तक स्कर्ट भरपूर लम्बे ,घुटने के काफी नीचे तक होते थे। लेकिन अंग्रेजी स्कूलों ने यूनिफार्म को पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया और फिर स्कूल से ही यूनिफार्म सिलकर मिलने लगे और धीऱे धीऱे स्कर्ट घुटने के ऊपर तक कब आ गया पता ही नही चला। कोई भी कार्य जब धीऱे धीऱे होता है तो बदलाव समझ नही आता तो बहन बेटियां जिस छोटे स्कर्ट को प्राथमिक विद्यालय में आसानी से बेहिचक पहन लिया वही स्कर्ट जब 8 वि कक्षा के ऊपर की कक्षाओ में छोटा होते गया तो बेटियों को बिल्कुल भी मानसिक बैचेनी नही हुई (भले ही माता पिता को होती रही हो किंतु...

ईल्लु २७

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड़यंत्र! भाग-27 टीवी पर प्रश्नोत्तरी मित्रो 1984 से 1991 तक टीवी पर दूरदर्शन ही एकमात्र चैनल होता था 1991 के बाद केबल टीबी,अनेक चैनलों का आरम्भ हुआ तो दूरदर्शन पर  प्रत्येक रात को समाचार के बाद कोई धारावाहिक आता फिर शास्त्त्रीय संगीत का कॉर्यक्रम आता था प्रतिदिन। रविवार सुबह 8 से रात 11 तक पूरा मनोरंजन का दिन होता था रविवार को सुबह 8 बजे से रंगोली (फिल्मों के प्रसिद्ध गीत) ,रामायण या महाभारत, पंचतंत्र या खजाना (विश्व प्रसिद्ध कहानियां) आदि के धारावाहिक आते थे शाम 6 बजे एक हिंदी फिल्म आती थी। इन्ही रविवारी कार्यक्रमो के बीच में 11 बजे एक विशेष कार्यक्रम आता था स्कुली विद्यार्थियों के लिये प्रश्नोत्तरी कॉर्यक्रम अर्थात Quiz मंच पर प्रश्नकर्ता रहते और सामने देश के विभिन्न स्कूलों से चुने हुए छात्रों की 4 जोड़ियां रहती थी। ( किसी को आज तक नही पता चला कि किस तरह ये विद्यार्थी इस टीवी कार्यक्रम के लिये चुने जाते थे ये पूर्ण रह्स्य है) आपको आश्चर्य होगा ये जानकर कि दूरदर्शन पर प्रतिदिन केवल अंग्रेजी न्यूज ही एकमात्र अंग्रेजी कार्यक्रम...

ईल्लु २८

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र! भाग-28 स्कूली विद्यार्थियों को टारगेट बनाना। मित्रो भारत के लोगो को लगता था और अभी भी लगता है कि अख़बार अलग है पत्रिकाएं अलग होती है। फिल्मे कोई बनाता है। टीवी अलग होती है। और ये सब स्वतंत्र होते है। पर इन माध्यमो की खबरों के तरीके गुणवत्ता पर ध्यान देंगे तो पता चल जाएगा कि उपर्युक्त सबके पीछे कोई नियंत्रक भी बैठा है। मेरे पिता जी बताते है कि 1988-89 में सुबह 8 बजे दुरदर्शन पर teenage turmoil नामक एक कार्यक्रम आता था जिसमे स्कुल के कक्षा 9 से ऊपर के विद्यार्थियों लड़के लड़कियों को एक दूसरे की तरफ आकर्षित होते दिखाने वाला कार्यक्रम होता था। और ये वही समयकाल था जब स्कूलों में पहली बार यौन शिक्षा के नाम पर महिला पुरुष के गुप्त अंगो के चित्र सहित जीव विज्ञान की किताब में अध्याय आरम्भ हुआ था। ये वही समयकाल था जब अखबारों में टेनिस खिलाड़ियों मार्टिना नवरातिलोवा के मैच के दौरान महिला खिलाड़ी के विशिष्ट अंगो को दिखाने वाले बड़े बड़े फोटो अखबारों में आते थे। ये वही समयकाल था जब बॉलीवुड में राजकपूर की प्रसिद्ध फिल्मों में कुछ मिनट क...

ईल्लु २९

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-29 महर्षि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय मित्रो 1994 में राज्य मध्यप्रदेश जबलपुर की एक तहसील उमरिया में भावातीत ध्यान के प्रकटकर्ता महर्षि महेश योगी जी ने अंतरराष्ट्रीय हिन्दू वैदिक विश्व विद्यालय खोले जाने की घोषणा की थी जिसके अंतर्गत दुनिया की सबसे ऊंची 100 मंजिला भवन बनाया जा रहा था जिसमे 1 लाख ब्राह्मण वेदो, शास्त्रो का अध्ययन करते। इसके लिए जमीन के सर्वे हेतु विदेश विशेषज्ञों की टीम आई नक्शा तैयार हुआ करीब 50 किलोमीटर घेरे की जमीन खरीदने की प्रक्रिया आरम्भ हो गई निर्माण सम्बन्धी फ़ाइल मध्य प्रदेश की दिग्विजय सिंह की कांग्रेज़ सरकार के कार्यालयों में घूमती रही। फिर जून 1997 में जबलपुर में भूकम्प आया और फिर तहसील के पटवारी ने लिखकर दिया कि भूकंप ग्रस्त क्षेत्र में 100 मंजिल इमारत बनाना खतरनाक होगा और मात्र इस पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेज़ सरकार ने अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को पूरी तरह निरस्त कर दिया जबकि समस्त राष्ट्रीय मिडिया,समाचार पत्रों, पत्रिकाओं , मध्यप्रदेश के सरकारी गजट में ये प्रोजेक्ट प्रकाश...

ईल्लु ३०

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र भाग-30 वास्तु शास्त्र मित्रो प्राचीन काल मे प्रलय के पश्चात सभी तरह का ज्ञान सप्तऋषियों को भगवान ब्रह्माजी एवं भगवान विष्णु से प्राप्त हुआ था मनुष्य को शिक्षित करने,जीवन निर्वाह सिखाने,कपड़ा,भोजन कृषि ,नगर बसाने आदि का ज्ञान ऋषियो ने मनुष्यो को दिया जिसका उल्लेख पुराणों (अर्थात सनातन हिन्दू इतिहास ग्रन्थ) में मिलता है। अग्निपुराण में एक नगर किस परिमाण का बसाया जाए, इसमें कौन सा भवन,किस व्यापार,कर्म के लोग किस तरफ निवास करे, सड़क,नाली,बाँध,तालाब आदि की व्यवस्था कैसी हो इसका पूर्ण विवरण अग्निपुराण एव अन्य पुराणों में दिया हुआ है। घर बनाने का ,घर की लंबाई चौड़ाई,आंगन आदि किस नाप के हो, ये सब विवरण भी इस ग्रंथ एवम अन्य ग्रंथो में होता है कोणार्क का सूर्य मन्दिर, अंकोरवाट मन्दिर, मुल्तान स्थित विशाल सूर्य मन्दिर (अब नष्ट),अजंता एलोरा गुफाएं ,आमेर का किला,हवामहल,जलमहल,मांडू का किला, इन सबकी वास्तुकला के विषय में स्कूल कालेज की किताबो में कोई वर्णन नही किया जाता। जबकि मुगलो ने जिन मंदिरो,महलों को तोड़कर उनका कुछ रूप बदल दिया उनके विष...