ईल्लु ६

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षणयंत्र

भाग-6

मित्रो उत्तर भारत की स्कूली किताबो में दक्षिण भारत के किसी इतिहास,संत,सामाजिक उत्थान के  प्राचीन राजाओ,विशाल मंदिरो का कोई उल्लेख नहीं!

ऐसा क्यों?

मतलब दक्षिण भारत को उत्तर से अलग करने की पूरी तैयारी 1947 के पहले ही कि जा चुकी थी जो आज तक जारी है।

किसके इशारे पर?

अब तो देश के अनेक राज्यो में कांग्रेज़ सरकार नही है फिर भी पाठ्यक्रम बिल्कुल भी बदला नहीं किया जा रहा है ऐसा क्यों??

जैन सम्प्रदाय के बारे में स्कूली किताब में सीधे 24 वे तीर्थंकर की चर्चा क्यों?

यदि जैन सम्प्रदाय के विषय में बताना है यो प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी के बारे में क्यों नही बताते किताबो में?

अगर बता दिया तो जैन को हिन्दू से अलग रखने का राष्ट्रविरोधी शक्तियों का खेल नहीं हो पायेगा पुराणों में वर्णन है भगवान ऋषभदेव इच्छावाकु वंश में जन्म लिए थे जिस वंश में सत्यावादी राजा हरिश्चन्द्र, सम्राट दिलीप,भगवान श्री राम जी ने जन्म लिया था हमारी पिछली पीढ़ी को पता था कि जैन सम्प्रदाय सनातन धर्म का अभिन्न अंग है और पूर्ण रूप से अहिंसा व्रतधारी है। लेकिन नई पीढ़ी जैनियों को हिन्दू नही मानते और जैन सम्प्रदाय के हिन्दू भी स्वयं को हिन्दू स्वीकार नही करते।

जब बुद्ध के विषय में स्कूल में अध्याय है तो ये क्यों नहीं बताया जाता कि अफगानिस्तान में 200 फुट ऊँची बुद्ध की अनेक प्रतिमाएं थी यानी भारत के सम्राट का राज्य अफगानिस्तान तक था भारत के सम्राट ने थाईलैंड तक बौद्ध धम्म प्रसारित किया और बर्मा,थाईलैंड सब विराट भारतवर्ष के आधीन थे।

और गौतम बुद्ध स्वयं हिन्दू क्षत्रिय राजा की संतान थे अर्थात बौद्ध मत भी सनातन का अभिन्न अँग है
आज नव बौद्ध भीमटे सनातन धर्म विरोधी है पहले ऐसा नही था।

आखिर भारत के विद्यार्थियों को ही क्यो भ्रमित किया जा रहा है?

और सरकार कोई भी पाठ्यक्रम क्यो नही बदल रही है?

किसके इशारे पर ??

संज्ञानात्मक

जय श्री राम
⚔️🦁🚩

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