ईल्लु ११

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र

भाग-11

मित्रो भारत में 1947 के बाद अंग्रेजी भाषा में लिखित विषय स्कूलों में इस तर्क के साथ आरम्भ किया गया कि यूरोप का समस्त विज्ञान अंग्रेजी में है इसलिये स्कूलों में अंग्रेजी आवश्यक है।

क्या ये आश्चर्य की बात नहीं कि 1950 में भारत की 35 करोड़ आबादी में यदि 5 करोड़ स्कूली विद्यार्थी थे तो केवल 3 विषय भौतिक विज्ञान physics,रसायन विज्ञान chemistry,जीव विज्ञान Biology की शायद 40 किताबो को पढ़ाने के लिये 5 करोड़ विद्यार्थियों को अंग्रेजी सिखाने की आवश्यकता क्यो पड़ी?

जबकि इन 40 किताबो को हिंदी में एवं अन्य प्रचलित भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता था केवल 40 अनुवादक ही 1 माह मेहनत करते तो 5 करोड़ विद्यार्थीं और आज के 30 करोड़ विद्यार्थी भाषा की परेशानी से बच जाते कि पहले अंग्रेजी सीखो फिर विज्ञान सीखो।

साथ ही अब जबकि अंग्रेजी के स्कूल/कालेज गावो तक में खुल चुके है तो विज्ञान, कार्मस ,आर्ट्स आदि की किताब एवं समस्त किताबे अंग्रेजी में हो चुकी है।
और अंग्रेजी मॉध्यम में पढ़ने वाला विद्यार्थी जब अंग्रेजी जानने,समझने लगा है और अपने विज्ञान,कॉमर्स आदि विषय की भाषावाली से परिचित हो चुका है।

तो अंग्रेजी मीडियम में होने के कारण कक्षा 9 से 12 की हर किताब अंग्रेजी में है और स्कुल में कक्षा 9 से 12 तक अंग्रेजी साहित्य की 3 या 4 किताबे पढ़ाई जाती है जिसमे शेक्सपियर के फालतू नाटक,व्यर्थ की अंग्रेजी कविताये,टाल्सटाय की कहानियां आदि रहती है।

जिससे पाठ्यक्रम का बोझ बढ़ता है बैग का बोझ बढ़ता है और इन व्यर्थ की किताबो से कोई ज्ञान प्राप्त नहीं होता।

अर्थात इससे साफ पता चलता है विदेशी लेखकों,विदेशी साहित्य की तरफ बाल बुद्धि को आकर्षित करके भविष्य में विदेशी प्रकाशकों की किताबें बिकवाना ही उद्देश्य है जोकि रेलवे स्टेशनों के बुक स्टालों में स्पष्ट दिखाई पड़ता है।

यदि अंग्रेजी साहित्य ही पढ़ाना है तो अंग्रेजी में अनुवादित चाणक्य नीति,कौटिल्य अर्थशास्त्र,पंचतंत्र , मालगुडी डेज आदि क्यों नहीं पढ़ाये जाते जो कि बच्चों को बेहतर समझ आते हो?

जानबूझकर भारतीय साहित्य की उपेक्षा और विदेशी साहित्य को प्रसिद्ध करते जाने का 1947 से लेकर अब तक का दोषी कौन है??

सरकार बदलती गई पर कोई भी नीति 1 इंच भी नही बदली इन्हें संचालित करने वाला परदे के पीछे कौन है???

संज्ञान लीजिए

जय श्री राम
⚔️🦁🚩

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