ईल्लु १०
इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षणयंत्र
भाग-10
कोलंबस ने अमेरिका खोजा!
वास्कोडिगामा ने भारत खोजा!
क्या ये पढ़ाने की जरुरत है भारत के इतिहास की किताबो में??
कोलंबस समुद्री यात्रा पर निकला क्योंकि उसने भारत के विषय में सुन रखा था अर्थात भारत देश का स्वर्णिम अस्तित्व पहले से था और कोलंबस के देश के लोगो को ये जानकारी थी।
किंतु वो समुद्री रास्ता भटक गया और अमेरिका पहुच गया अर्थात भारत तक पहुचाने के समुद्री रास्ते का ज्ञान या नक्शा उसके पास था किंतु किसी तूफ़ान आदि के कारण उसकी नौका गलत दिशा में चली गई।
कोलंबस के देश में नक्शा बनाने वाले लोगो ने पहले ही भारत घूम लिया था तभी तो नक्शा बना पाने में सफल हुए थे।
अब वास्कोडिगामा!
ये समुद्री रास्ते से भारत पहुचने में सफल हुआ ना कि इसने भारत की खोज की वास्तव में ये विजय नगर साम्राज्य के विशाल व्यापारिक जहाज का पीछा करते हुए भारत आया था।
तो ये दोनों घटनाएं किस्से अगर किसी दूसरे देश के, विशेषकर यूरोप के स्कूली बच्चे पढ़े तो उचित ही है।
किंतु हम भारतीयों के लिये तो ये हास्यास्पद शब्दावली है क्योंकि भारत वर्ष का अस्तित्व तो यूरोप के हजारो वर्षो पूर्व से है और यूरोप,कैलीफोर्निया के जंगलों,अफ्रीका के जंगलों में शिवजी की मूर्तियां,होंडुरास के जंगलों में हनुमान जी की मूर्ती, मिस्र में धनुर्धारी राम और सूर्य के चित्र मिलते है अर्थात इन देशों में भारतीय आते जाते रहते थे किंतु इन देशों,क्षेत्रो के निवासियों के पास,भारत तक पहुच पाने के उचीत साधन, नौका, नक्शा, ज्ञान आदि नही होता था।
भारत के स्कूली किताबो में ये बात पढ़ाई जानी चाहिए कि विदेशियों के लिये समुद्री मार्ग का ठीक से पता वास्कोडिगामा ने लगाया ना कि उसने भारत को खोजा!
किन्तु ये झूठ आज भी पढ़ाया जा रहा 1947 से आज तक किसके दवाब में ???
संज्ञान लीजिए
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
भाग-10
कोलंबस ने अमेरिका खोजा!
वास्कोडिगामा ने भारत खोजा!
क्या ये पढ़ाने की जरुरत है भारत के इतिहास की किताबो में??
कोलंबस समुद्री यात्रा पर निकला क्योंकि उसने भारत के विषय में सुन रखा था अर्थात भारत देश का स्वर्णिम अस्तित्व पहले से था और कोलंबस के देश के लोगो को ये जानकारी थी।
किंतु वो समुद्री रास्ता भटक गया और अमेरिका पहुच गया अर्थात भारत तक पहुचाने के समुद्री रास्ते का ज्ञान या नक्शा उसके पास था किंतु किसी तूफ़ान आदि के कारण उसकी नौका गलत दिशा में चली गई।
कोलंबस के देश में नक्शा बनाने वाले लोगो ने पहले ही भारत घूम लिया था तभी तो नक्शा बना पाने में सफल हुए थे।
अब वास्कोडिगामा!
ये समुद्री रास्ते से भारत पहुचने में सफल हुआ ना कि इसने भारत की खोज की वास्तव में ये विजय नगर साम्राज्य के विशाल व्यापारिक जहाज का पीछा करते हुए भारत आया था।
तो ये दोनों घटनाएं किस्से अगर किसी दूसरे देश के, विशेषकर यूरोप के स्कूली बच्चे पढ़े तो उचित ही है।
किंतु हम भारतीयों के लिये तो ये हास्यास्पद शब्दावली है क्योंकि भारत वर्ष का अस्तित्व तो यूरोप के हजारो वर्षो पूर्व से है और यूरोप,कैलीफोर्निया के जंगलों,अफ्रीका के जंगलों में शिवजी की मूर्तियां,होंडुरास के जंगलों में हनुमान जी की मूर्ती, मिस्र में धनुर्धारी राम और सूर्य के चित्र मिलते है अर्थात इन देशों में भारतीय आते जाते रहते थे किंतु इन देशों,क्षेत्रो के निवासियों के पास,भारत तक पहुच पाने के उचीत साधन, नौका, नक्शा, ज्ञान आदि नही होता था।
भारत के स्कूली किताबो में ये बात पढ़ाई जानी चाहिए कि विदेशियों के लिये समुद्री मार्ग का ठीक से पता वास्कोडिगामा ने लगाया ना कि उसने भारत को खोजा!
किन्तु ये झूठ आज भी पढ़ाया जा रहा 1947 से आज तक किसके दवाब में ???
संज्ञान लीजिए
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
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