ईल्लु २०
इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र
भाग-20
MBA, MCA कोर्स
मित्रो भारत देश में शायद 1990 में MBA, MCA पाठ्यक्रम आरम्भ हुआ जो लोग बीएससी, बीई, बीए आदि स्नातक पाठ्यक्रम कर रहे थे या कर चुके थे तो उनको ये नए पाठ्यक्रम समझ में नही आये लेकिन कुछ विद्यार्थियों ने MSc में प्रवेश लिया तो कुछ ने MBA, MCA कोर्स पसंद किया।
उस समय शिवखेड़ा नाम के आदमी को पूरे भारत में मैनेजमेंट गुरु बनाकर प्रचारित किया गया दैनिक भास्कर ने विराट आयोजन किये हर जिला स्तर के शहर में ताकि इन नए डिग्री कोर्सेस का प्रचार हो युवा आकर्षित हो।(और आज इस तथाकातीत मैनेजमेंट गुरु का कोई अता पता नही ये केवल एक मुखौटा था )
आगे इन नये विषयों का भविष्य बिल्कुल स्पष्ट नहीं था कि नौकरी कहाँ और कितने वेतन वाली मिलेगी??
बीएससी के बाद आरंभिक कम्प्यूटर कोर्स करने वालो को मेरे बड़े भाई ने फटी चप्पल पहने देखा था 1989 में फिर 1995 में भारत में अचानक एक आर्थिक अंतराष्ट्रीय विस्फोट होता है और प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव डंकल प्रस्ताव स्वीकार कर लेते है और GATT समझौते पर हस्ताक्षर किये जाते है।
WTO का मुख्यालय भारत में खुल जाता है और विदेशी कम्पनियो को बैंक,बीमा, उद्योग ,निर्माण ,विदेशी उत्पाद की भारत के खुले बाजार में मार्केटिंग ,अमेरिकी कम्प्यूटर कम्पनियो के काल सेंटर भारत में खोलने की अनुमति मिल जाती है और अब रह्स्य खुलता है 1990 में आरम्भ की गई MBA, MCA डिग्रियों का।
GATT समझौता यु ही अचानक 1995 में हस्ताक्षरित नही हुआ था बल्कि ये पूर्व निर्धारित वर्ष था और भारत के लोगो को दिखाने के लिये कि हमको अंतर राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करनी है तो 1 साल तक GATT पर भारत सरकार और WTO की नूरा कुश्ती , चर्चा, विरोध, आदि चलती रही फिर 1995 में नरसिम्हाराव ने हस्ताक्षर किया जोकि पूर्व निर्धारित सटीक वर्ष समय था।
अब भारत में और अंतरराष्ट्रीय बाजार हेतु विदेशी व्यापारियों कम्पनियो को नये तरह के उत्पाद की नौकरी हेतु नए तरह की व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त प्रत्याशियों की जरुरत पड़नी थी इस समझौते के बाद अचानक बहुत सारे मेनेजर, कम्प्यूटर संचालक, प्रोग्रामरों की आवश्यकता पड़नी थी।
तो इसकी पूर्ति के लिये 1990 से ही भारत में तैयारी आरम्भ हो चुकी थी और 1995 तक जब 5 साल में पर्याप्त डिग्री वाले लोग तैयार हो गए तो 1995 में डंकल प्रस्ताव लागू हो गया भारत में धड़ाधड़ विदेशी संस्थान खुलने लगे 1998 तक ये कम्पनिया भारत में पूर्ण रूप से हर बड़े शहर के स्थापित होने लगी।
बैंकों के लिये मैनेजर की योग्यता MBA (जोकि पहले MCom वाले होते थे ) निर्धारित की गई, बहुराष्ट्र्रीय , अमेरिकन कम्पनियो के काल सेंटर,विदेशी बीमा कम्पनी एवम कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग विकसित करने हेतु कम्प्यूटर प्रोफेसनल्स की आवश्यता हुई।
तो MCA वाले डिग्री हाथ में लेकर तैयार खड़े थे, हजारो लोगो को रोजगार मिला और तत्कालीन प्रचलित वेतन से 4 गुना वेतन मिलना आरम्भ हुआ और इस तरह एक बना बनाया बौद्धिक इंफ्रास्ट्रक्चर विदेशी कम्पनियों को मिल गया भारतीय खर्चे पर और भारत के लोगो ने समझा कि कितना अच्छा हुआ पर परदे के पीछे का असली खेल कुछ और ही था।
भारत के लोग ये नही समझ पाए कि इल्लुनमिनाती के योजनाबद्घ चरण के अनुसार बकरों को तैयार किया गया भारतीयों को बहुत उच्च वेतन मिल रहा था तो नुक्सान क्या हुआ ???
नुक्सान ये हुआ कि पूरे भारत का श्रेष्ठतम दिमाग इन विदेशी कम्पनियो की सेवा में लग गया जो दिमाग बैकिंग,मार्केटिंग,कॉल सेंटर BPO, प्रोग्रामिंग में लग रहा था उस आविष्कारक भारतीय दिमाग को नरसिम्हाराव सरकार ने उत्पादक मालिक की जगह सेवक बना दिया।
अमेरिका की मोबाइल,कम्प्यूटर कम्पनियो को चलाने वाले कम्प्यूटर मोबाइल निर्मित करने वाले,फेसबुक, हॉटमेल का आविष्कार करने वाले भारतीय लड़के ही थे।
तो जिन लड़को को मालिक बनकर उद्योग कम्पनियो, मोबाइल, कम्प्यूटर, का निर्माण भारत में करना था पूरी दुनिया में भारत निर्मित सस्ते मोबाइल,कम्प्यूटर को छा जाना था और इन चीजो को विदेश में बेचकर भारत की आर्थिक स्थिति पुरे यूरोप के बजट से 100 गुनी बेहतर हो जाती केवल 10 साल में ही पर वही लड़के मजबूरी में 1995 से आज तक इन कम्पनियो की सेवा में 24x7 घण्टे खून सुखाते हुए लगे हुए है।
क्योंकि 1930 से लेकर अब तक की भारतीय दिमाग का अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला कि भारतीयों (हिन्दू, जैन,सिख,बौद्ध)से अच्छे,विश्वासपात्र,आज्ञाकारी,बुद्धिमान दुनिया की कोई दूसरी कौम नहीं है।
अब षड्यंत्र के तहत भारत में स्वदेशी मोबाइल,स्वदेशी कम्यूटर के निर्माण की अनुमति नही दी गई भारत सरकार द्वारा मालिक को नौकर बनाकर रखने की योजना हेतु इल्लु कदम दर कदम कार्य निर्धारित करता है 1990 के नये पाठ्यक्रमो से स्पष्ट है।
भारत की शिक्षा नीति कोर्स सब अमेरिकन यूरोप की आवश्यकता के अनुरूप निर्धारित होता है।
संज्ञान लीजिए
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
भाग-20
MBA, MCA कोर्स
मित्रो भारत देश में शायद 1990 में MBA, MCA पाठ्यक्रम आरम्भ हुआ जो लोग बीएससी, बीई, बीए आदि स्नातक पाठ्यक्रम कर रहे थे या कर चुके थे तो उनको ये नए पाठ्यक्रम समझ में नही आये लेकिन कुछ विद्यार्थियों ने MSc में प्रवेश लिया तो कुछ ने MBA, MCA कोर्स पसंद किया।
उस समय शिवखेड़ा नाम के आदमी को पूरे भारत में मैनेजमेंट गुरु बनाकर प्रचारित किया गया दैनिक भास्कर ने विराट आयोजन किये हर जिला स्तर के शहर में ताकि इन नए डिग्री कोर्सेस का प्रचार हो युवा आकर्षित हो।(और आज इस तथाकातीत मैनेजमेंट गुरु का कोई अता पता नही ये केवल एक मुखौटा था )
आगे इन नये विषयों का भविष्य बिल्कुल स्पष्ट नहीं था कि नौकरी कहाँ और कितने वेतन वाली मिलेगी??
बीएससी के बाद आरंभिक कम्प्यूटर कोर्स करने वालो को मेरे बड़े भाई ने फटी चप्पल पहने देखा था 1989 में फिर 1995 में भारत में अचानक एक आर्थिक अंतराष्ट्रीय विस्फोट होता है और प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव डंकल प्रस्ताव स्वीकार कर लेते है और GATT समझौते पर हस्ताक्षर किये जाते है।
WTO का मुख्यालय भारत में खुल जाता है और विदेशी कम्पनियो को बैंक,बीमा, उद्योग ,निर्माण ,विदेशी उत्पाद की भारत के खुले बाजार में मार्केटिंग ,अमेरिकी कम्प्यूटर कम्पनियो के काल सेंटर भारत में खोलने की अनुमति मिल जाती है और अब रह्स्य खुलता है 1990 में आरम्भ की गई MBA, MCA डिग्रियों का।
GATT समझौता यु ही अचानक 1995 में हस्ताक्षरित नही हुआ था बल्कि ये पूर्व निर्धारित वर्ष था और भारत के लोगो को दिखाने के लिये कि हमको अंतर राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करनी है तो 1 साल तक GATT पर भारत सरकार और WTO की नूरा कुश्ती , चर्चा, विरोध, आदि चलती रही फिर 1995 में नरसिम्हाराव ने हस्ताक्षर किया जोकि पूर्व निर्धारित सटीक वर्ष समय था।
अब भारत में और अंतरराष्ट्रीय बाजार हेतु विदेशी व्यापारियों कम्पनियो को नये तरह के उत्पाद की नौकरी हेतु नए तरह की व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त प्रत्याशियों की जरुरत पड़नी थी इस समझौते के बाद अचानक बहुत सारे मेनेजर, कम्प्यूटर संचालक, प्रोग्रामरों की आवश्यकता पड़नी थी।
तो इसकी पूर्ति के लिये 1990 से ही भारत में तैयारी आरम्भ हो चुकी थी और 1995 तक जब 5 साल में पर्याप्त डिग्री वाले लोग तैयार हो गए तो 1995 में डंकल प्रस्ताव लागू हो गया भारत में धड़ाधड़ विदेशी संस्थान खुलने लगे 1998 तक ये कम्पनिया भारत में पूर्ण रूप से हर बड़े शहर के स्थापित होने लगी।
बैंकों के लिये मैनेजर की योग्यता MBA (जोकि पहले MCom वाले होते थे ) निर्धारित की गई, बहुराष्ट्र्रीय , अमेरिकन कम्पनियो के काल सेंटर,विदेशी बीमा कम्पनी एवम कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग विकसित करने हेतु कम्प्यूटर प्रोफेसनल्स की आवश्यता हुई।
तो MCA वाले डिग्री हाथ में लेकर तैयार खड़े थे, हजारो लोगो को रोजगार मिला और तत्कालीन प्रचलित वेतन से 4 गुना वेतन मिलना आरम्भ हुआ और इस तरह एक बना बनाया बौद्धिक इंफ्रास्ट्रक्चर विदेशी कम्पनियों को मिल गया भारतीय खर्चे पर और भारत के लोगो ने समझा कि कितना अच्छा हुआ पर परदे के पीछे का असली खेल कुछ और ही था।
भारत के लोग ये नही समझ पाए कि इल्लुनमिनाती के योजनाबद्घ चरण के अनुसार बकरों को तैयार किया गया भारतीयों को बहुत उच्च वेतन मिल रहा था तो नुक्सान क्या हुआ ???
नुक्सान ये हुआ कि पूरे भारत का श्रेष्ठतम दिमाग इन विदेशी कम्पनियो की सेवा में लग गया जो दिमाग बैकिंग,मार्केटिंग,कॉल सेंटर BPO, प्रोग्रामिंग में लग रहा था उस आविष्कारक भारतीय दिमाग को नरसिम्हाराव सरकार ने उत्पादक मालिक की जगह सेवक बना दिया।
अमेरिका की मोबाइल,कम्प्यूटर कम्पनियो को चलाने वाले कम्प्यूटर मोबाइल निर्मित करने वाले,फेसबुक, हॉटमेल का आविष्कार करने वाले भारतीय लड़के ही थे।
तो जिन लड़को को मालिक बनकर उद्योग कम्पनियो, मोबाइल, कम्प्यूटर, का निर्माण भारत में करना था पूरी दुनिया में भारत निर्मित सस्ते मोबाइल,कम्प्यूटर को छा जाना था और इन चीजो को विदेश में बेचकर भारत की आर्थिक स्थिति पुरे यूरोप के बजट से 100 गुनी बेहतर हो जाती केवल 10 साल में ही पर वही लड़के मजबूरी में 1995 से आज तक इन कम्पनियो की सेवा में 24x7 घण्टे खून सुखाते हुए लगे हुए है।
क्योंकि 1930 से लेकर अब तक की भारतीय दिमाग का अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला कि भारतीयों (हिन्दू, जैन,सिख,बौद्ध)से अच्छे,विश्वासपात्र,आज्ञाकारी,बुद्धिमान दुनिया की कोई दूसरी कौम नहीं है।
अब षड्यंत्र के तहत भारत में स्वदेशी मोबाइल,स्वदेशी कम्यूटर के निर्माण की अनुमति नही दी गई भारत सरकार द्वारा मालिक को नौकर बनाकर रखने की योजना हेतु इल्लु कदम दर कदम कार्य निर्धारित करता है 1990 के नये पाठ्यक्रमो से स्पष्ट है।
भारत की शिक्षा नीति कोर्स सब अमेरिकन यूरोप की आवश्यकता के अनुरूप निर्धारित होता है।
संज्ञान लीजिए
जय श्री राम
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