ईल्लु १४

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र

भाग-14

कम्प्यूटर

मित्रो ज्ञान की वृद्धि विभिन्न किताबो के अध्ययन और चिंतन से होती है किंतु किताबो से अध्य्यन की प्रवृत्त्ति अब विद्यार्थियों में प्रायः समाप्त हो रही है क्योंकि कम्प्यूटर पर गूगल के मॉध्यम से सब कुछ उपलब्ध है।

और कम्प्यूटर को कक्षा 6 से सीबीएसई स्कूली पाठ्यक्रम् में सम्मिलित किया गया है क्या स्कूली विद्यार्थियो के लिए ये आवश्यक है??

आपके घर में कूलर,फ्रिज,एसी, बाइक,कार,पानी की मोटर ,ट्यूबलाइट सबकुछ है और ये सब विज्ञान नहीं है बल्कि ये विज्ञान के अंतिम सुविधाजनक उपभोक्ता उत्पाद है।

जिसको वर्तमान में consumer product कहते है और consumer इसका end user अंतिम उपयोगकर्ता होता है तो क्या उपर्युक्त प्रतिदिन उपयोग में आने वाले वस्तुओं के विषय में स्कूलो में 6वी से लेकर 10वी तक कुछ भी पढ़ाया जाता है??

उत्तर- नही पढ़ाया जाता!

फिर कम्प्यूटर की पढ़ाई, इसके साफ्टवेयर, हार्डवेयर के विषय में कक्षा 6 से पढ़ाना क्यों आरम्भ किया??

क्योंकि
1.जब ये चीजे पाठ्यक्रम में होगी तो विद्यालय में हर कक्षा में कम्प्यूटर रखना होगा जोकि अभी परम्परा लागू हो चुकी है जिसके लिए भुगतान विद्यार्थियों के माता पिता करते है।

इस तरह बिना विज्ञापन,मार्केटिंग, सेल्समैन के इन सब के खर्चो को बचाते हुए इल्लु जियोनिस्ट एजेंटो ने यत्नपूर्वक स्कूली पाठ्यक्रम में कम्प्यूटर अध्याय डालवा दिया फिर स्कूलों ने कम्प्यूटर खरीदे।

माता पिता ने कम्प्यूटर खरीदे,प्रिंटर,माउस,कीबोर्ड आदि सहायक वस्तुएं खरीदते जा रहे प्रतिवर्ष और इस तरह अरबो रुपए का व्यापार अमेरिका ने कर लिया बिना एक कदम धुप में मेहनत किये।

इस तरह भारत फिर गरीब हुआ क्योंकि भारतीय अरबो रूपये की मुद्रा प्रतिवर्ष विदेश जाती है मात्र इस कम्प्यूटर आध्याय के कारण।

2.अब पाठ्यक्रम में कोई भी विषय वस्तु का वर्णन होता है जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक तो शिक्षक कहते है उनकी फोटो लाओ और 2 लाइन उनके विषय में लिखकर लाओ!
तो विद्यार्थी सायबर कैफे जाते है या घर में इंटरनेट से प्रश्नों के उत्तर खोजते है प्रिंट करते है।

इस तरह प्रिंटर उसकी स्याही की भी अरबो रूपये की बिक्री हर घर में,बिना सेल्समैन,विज्ञापन के हो जाती है और भारत का रुपया फिर गया प्रत्येक ऐसे प्रिंट पेज के साथ।

3.अब जब घर में इंटरनेट होगा तो हम किसी भी विषय को सर्च करे तो अनेकानेक फोटो के बीच में या साहित्य के नीचे अवश्य ही एक अश्लील फोटो,वीडियो आ जाता है ऐड के रूप में।
भले ही आप दुनिया के धर्म, या ईसा मसीह, या श्रीराम गूगल पर लिखेगे तब भी यही परिणाम निकलेगा यानी एक हजार गेहू के दानों के साथ केवल 1 घुन जोकि पुरे गेहू को बर्बाद कर देगी।

और इस अश्लील चित्र या वीडियो के साथ, इल्लु का उद्देश्य पूर्ण होता है भारत के विद्यार्थियों को गलत दिशा में खींचने के लिए।

मित्रो यही कारण है स्कूली पाठ्यक्रम में कम्प्यूटर सम्मिलित करवाने का कम्प्यूटर इंजीनियरिंग का एक आविष्कार है मूलभूत विज्ञान नही कम्प्यूटर का मूलभूत विज्ञान इलेक्टानिक्स एवं प्रोग्रामिंग है जोकि इंजीनियरिंग स्तर की होती है।

विद्यालयों में मूलभूत विज्ञान सन 2000 तक पढ़ाया जाता था फिर अचानक पाठ्यक्रम में इतना व्यर्थ का बदलाव कैसे?
किसके इशारे पर?
जिससे भारत की आर्थिक हानि भी हो रही है और चारित्रिक हानि भी?

कौन है परदे के पीछे?

संज्ञान लीजिए

जय श्री राम
⚔️🦁🚩

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