ईल्लु ३०
इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र
भाग-30
वास्तु शास्त्र
मित्रो प्राचीन काल मे प्रलय के पश्चात सभी तरह का ज्ञान सप्तऋषियों को भगवान ब्रह्माजी एवं भगवान विष्णु से प्राप्त हुआ था मनुष्य को शिक्षित करने,जीवन निर्वाह सिखाने,कपड़ा,भोजन कृषि ,नगर बसाने आदि का ज्ञान ऋषियो ने मनुष्यो को दिया जिसका उल्लेख पुराणों (अर्थात सनातन हिन्दू इतिहास ग्रन्थ) में मिलता है।
अग्निपुराण में एक नगर किस परिमाण का बसाया जाए, इसमें कौन सा भवन,किस व्यापार,कर्म के लोग किस तरफ निवास करे, सड़क,नाली,बाँध,तालाब आदि की व्यवस्था कैसी हो इसका पूर्ण विवरण अग्निपुराण एव अन्य पुराणों में दिया हुआ है।
घर बनाने का ,घर की लंबाई चौड़ाई,आंगन आदि किस नाप के हो, ये सब विवरण भी इस ग्रंथ एवम अन्य ग्रंथो में होता है कोणार्क का सूर्य मन्दिर, अंकोरवाट मन्दिर, मुल्तान स्थित विशाल सूर्य मन्दिर (अब नष्ट),अजंता एलोरा गुफाएं ,आमेर का किला,हवामहल,जलमहल,मांडू का किला, इन सबकी वास्तुकला के विषय में स्कूल कालेज की किताबो में कोई वर्णन नही किया जाता।
जबकि मुगलो ने जिन मंदिरो,महलों को तोड़कर उनका कुछ रूप बदल दिया उनके विषय में अवश्य किताबो में वर्णन किया जाता है कि ये मुग़ल+हिन्दू वास्तुकला है जिसको अमुक मुसलमान बादशाह ने बनवाया(ताकि हिन्दू भवन ध्वस्त करने की बात छिपी रहे)
चुकी अग्निपुराण और अन्य पुराणों के अध्ययन से ये स्प्ष्ट हो जाता है कि योजनाबद्ध नगर बसाने,बाँध, तालाब, सिंचाई, कृषि व्यवस्था का आरम्भ भारत से ही हुआ है एक ये भी कारण है जिनकी वजह से पुराणों का विरोध होता है।
प्राचीन काल के उत्कृष्ट निर्माण कार्यो में इंद्रप्रस्थ को राजधानी के रूप में स्थापित करने के समय पांडवो द्वारा बनाए गया माया महल और महाराज परीक्षित द्वारा सांप के जहर से मृत्यु होने से बचने हेतु बनाये गए छिद्र विहीन भवन प्राचीनकाल की अद्भुत वास्तुकला,इंजीनियरिंग के उत्तम उदाहरण थे और आज भी हजारों मंदिरे उदाहरण के रूप में खड़ी हैं।
प्राचीन भारतीय वास्तुकला,नगर स्थापित करने की कला, प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग को भारत के स्कूली पाठ्यक्रम में पूरी तरह गायब कर दिया गया ताकि भारतीय प्राचीन हिन्दू वास्तु ज्ञान का यहां के विद्यार्थियों को पता ना चले और हर चीज को वो मुगलो,अंग्रेजो द्वारा बनाया मान ले।
देश के हर स्कूल,कालेज की पाठ्यक्रम किताबो से ये प्राचीन विषय वस्तुज्ञान पूरी तरह गायब है किसके दवाब में ??
संज्ञान लीजिये
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
भाग-30
वास्तु शास्त्र
मित्रो प्राचीन काल मे प्रलय के पश्चात सभी तरह का ज्ञान सप्तऋषियों को भगवान ब्रह्माजी एवं भगवान विष्णु से प्राप्त हुआ था मनुष्य को शिक्षित करने,जीवन निर्वाह सिखाने,कपड़ा,भोजन कृषि ,नगर बसाने आदि का ज्ञान ऋषियो ने मनुष्यो को दिया जिसका उल्लेख पुराणों (अर्थात सनातन हिन्दू इतिहास ग्रन्थ) में मिलता है।
अग्निपुराण में एक नगर किस परिमाण का बसाया जाए, इसमें कौन सा भवन,किस व्यापार,कर्म के लोग किस तरफ निवास करे, सड़क,नाली,बाँध,तालाब आदि की व्यवस्था कैसी हो इसका पूर्ण विवरण अग्निपुराण एव अन्य पुराणों में दिया हुआ है।
घर बनाने का ,घर की लंबाई चौड़ाई,आंगन आदि किस नाप के हो, ये सब विवरण भी इस ग्रंथ एवम अन्य ग्रंथो में होता है कोणार्क का सूर्य मन्दिर, अंकोरवाट मन्दिर, मुल्तान स्थित विशाल सूर्य मन्दिर (अब नष्ट),अजंता एलोरा गुफाएं ,आमेर का किला,हवामहल,जलमहल,मांडू का किला, इन सबकी वास्तुकला के विषय में स्कूल कालेज की किताबो में कोई वर्णन नही किया जाता।
जबकि मुगलो ने जिन मंदिरो,महलों को तोड़कर उनका कुछ रूप बदल दिया उनके विषय में अवश्य किताबो में वर्णन किया जाता है कि ये मुग़ल+हिन्दू वास्तुकला है जिसको अमुक मुसलमान बादशाह ने बनवाया(ताकि हिन्दू भवन ध्वस्त करने की बात छिपी रहे)
चुकी अग्निपुराण और अन्य पुराणों के अध्ययन से ये स्प्ष्ट हो जाता है कि योजनाबद्ध नगर बसाने,बाँध, तालाब, सिंचाई, कृषि व्यवस्था का आरम्भ भारत से ही हुआ है एक ये भी कारण है जिनकी वजह से पुराणों का विरोध होता है।
प्राचीन काल के उत्कृष्ट निर्माण कार्यो में इंद्रप्रस्थ को राजधानी के रूप में स्थापित करने के समय पांडवो द्वारा बनाए गया माया महल और महाराज परीक्षित द्वारा सांप के जहर से मृत्यु होने से बचने हेतु बनाये गए छिद्र विहीन भवन प्राचीनकाल की अद्भुत वास्तुकला,इंजीनियरिंग के उत्तम उदाहरण थे और आज भी हजारों मंदिरे उदाहरण के रूप में खड़ी हैं।
प्राचीन भारतीय वास्तुकला,नगर स्थापित करने की कला, प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग को भारत के स्कूली पाठ्यक्रम में पूरी तरह गायब कर दिया गया ताकि भारतीय प्राचीन हिन्दू वास्तु ज्ञान का यहां के विद्यार्थियों को पता ना चले और हर चीज को वो मुगलो,अंग्रेजो द्वारा बनाया मान ले।
देश के हर स्कूल,कालेज की पाठ्यक्रम किताबो से ये प्राचीन विषय वस्तुज्ञान पूरी तरह गायब है किसके दवाब में ??
संज्ञान लीजिये
जय श्री राम
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