ईल्लु २९

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र

भाग-29

महर्षि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय

मित्रो 1994 में राज्य मध्यप्रदेश जबलपुर की एक तहसील उमरिया में भावातीत ध्यान के प्रकटकर्ता महर्षि महेश योगी जी ने अंतरराष्ट्रीय हिन्दू वैदिक विश्व विद्यालय खोले जाने की घोषणा की थी जिसके अंतर्गत दुनिया की सबसे ऊंची 100 मंजिला भवन बनाया जा रहा था जिसमे 1 लाख ब्राह्मण वेदो, शास्त्रो का अध्ययन करते।

इसके लिए जमीन के सर्वे हेतु विदेश विशेषज्ञों की टीम आई नक्शा तैयार हुआ करीब 50 किलोमीटर घेरे की जमीन खरीदने की प्रक्रिया आरम्भ हो गई निर्माण सम्बन्धी फ़ाइल मध्य प्रदेश की दिग्विजय सिंह की कांग्रेज़ सरकार के कार्यालयों में घूमती रही।

फिर जून 1997 में जबलपुर में भूकम्प आया और फिर तहसील के पटवारी ने लिखकर दिया कि भूकंप ग्रस्त क्षेत्र में 100 मंजिल इमारत बनाना खतरनाक होगा और मात्र इस पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेज़ सरकार ने अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को पूरी तरह निरस्त कर दिया जबकि समस्त राष्ट्रीय मिडिया,समाचार पत्रों, पत्रिकाओं , मध्यप्रदेश के सरकारी गजट में ये प्रोजेक्ट प्रकाशित ,प्रचारित हो चूका था।

इस निरस्तीकरण के विषय में भूकम्प वैज्ञानिकों भवन विशेषज्ञों महर्षि के अंतरराष्ट्रीय स्तर के इंजीनियरों से कोई सलाह विचार लिए बिना प्रस्ताव रद्द कर दिया दिग्विजय सिंह सरकार ने जबकि सबको मालूम है चीन जापान में हर वर्ष भूकम्प आते है तो क्या वहा ऊँची इमारतें नही बनती??

अब सुनिए यदि ये हिन्दू अंतरराष्ट्रीय वैदिक विश्वविद्यालय बन जाता तो क्या हो जाता जिसे रोकना जरूरी था।

1.वैदिक विज्ञान,भावातीत ध्यान के भारतीय पंडित विशेषज्ञ पूरी दुनिया में छा जाते।

2.मध्य प्रदेश में एवं फिर पुरे देश में इसाई मिशनरियों का कार्य रुक जाता क्योंकि यहां के लोग देखते कि इसाई गोरे लोग तो स्वयं हिन्दू गुरुओं के चरणों में शरणागत होते है तो फिर इसाई धर्म में क्यों जाना?

3.वेद विज्ञान,यज्ञ विज्ञान,योग प्राणायाम, ज्योतिष विज्ञान,संस्कृत ,आयुर्वेद की दुनिया की सबसे बडी प्रयोगशाला,प्रशिक्षण शाला ,महर्षि का ये संस्थान होता तो फिर इन क्षेत्रों में कार्य कर रही विदेशी कान्वेंट दुकानें बंद होने लगती।

4. इस विश्वविद्यालय के खुलने के बाद इस्कान को भारत में कोई ग्राहक नही मिलते क्योंकि भारत का हिन्दू अपने धर्म,धर्मग्रंथो की शक्तियों से परिचित हो जाता।

5.शिक्षा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा प्रवाह भारत की ओर हो जाता।

6.अंग्रेजी फिर से मलेक्षो की भाषा मानी जाती और संस्कृत प्रतिष्ठित हो जाती जिससे अंग्रेजी स्कुल ,कालेज बन्द होने लगते तो इसाई मिशनरी का प्रभाव शून्य होने लग जाता और भारतीय मुद्रा जो इनके स्कूलों के माध्यम् से विदेश जाती है वो रुक जाती और उपर्युक्त कारणों से यूरोप,इंग्लैंड, अमेरिका के खजाने में बहुत गरीबी होने लग जाती।

तो इन कारणों से अन्तर्राष्ट्ररीय हिन्दू विश्विद्यालय भारत में बनाने से रोक दिया गया मात्र 12वी तक आर्ट्स पढ़े एक पटवारी की टिप्पणी के कारण।

क्योंकि भविष्य में 2014 में दुनिया के सबसे ऊंचे भवन अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रकारी इस्कान का निर्माण होना था वृंदावन में और अब किसी को भूकम्प ,बाढ़ की चिंता नहीं सता रही 20 वर्ष का अंतर रखकर इस्कान का षड्यंत्र सफल हो गया।

संज्ञान लीजिये

जय श्री राम
⚔️🦁🚩

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