ईल्लु ९

इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र!

भाग-9

मित्रो प्राचीन भारतीय इतिहास में मानव सभ्यता के विकास के विषय में बताते हुए स्कूली किताबो में लिखा जाता है कि आकाश से बिजली गिरते देखकर, फिर जंगलो में आग लगते देखकर मनुष्य ने आग के विषय में जाना,सीखा, फिर गुफा में आग जलाने लगे!

अब आप ये बताये कि बिजली क्या गर्मी के मौसम में कड़कती है जोकि जमीन तक पहुचकर आग लगाएगी या बारिश के मौसम में बिजली कड़कने पर ऐसा आग लगना सम्भव है??

और कितने वीर लोग है जोकि बिजली कड़कने पर उसके पास जाकर बीड़ी जलाते है या लकड़ी जलाकर आग घर तक ले आते है?

ये हास्यपद मूर्खतापूर्ण तथ्य मैक्समूलर ने यूरोप में पढ़ाई जाने किताबो के आधार पर भारतीय स्कूलों में लिखवाया लेकिन पंडित रविशंकर शुक्ल, मालवीय जी, गोविन्द बल्लभ पंत जैसे अनेक विद्वानों के होते हुवे भी इस झूठ का विरोध क्यों नही हुआ??

जबकि हमारे ऋग्वेद का प्रथम मन्त्र ही अग्नि देव को समर्पित है और वेद पृथ्वी पर अवतरित हुआ प्रथम ज्ञान का भंडार है ऋग्वेद में यज्ञ संपन्न करने का पूरा विवरण दिया हुआ है अर्थात ना केवल आग बल्कि अनाज, औषधि आदि के विषय में हमारे पूर्वज ऋषि लाखो साल पहले जानकार थे और मानव सभ्यता के भी पहले, पृथ्वी निर्माण के पहले,वेद पुराणो में अंतरिक्ष की घटनाओ के विषय में, सूर्य को अग्नि का गोला बताया गया है।

जब सृष्टि के प्रथम मानव 7 सप्तऋषियों, को अग्नि विज्ञान के बारे में बहुत कुछ ज्ञात था तो किसके इशारे पर यूरोप का झूठा और जूठा ज्ञान भारत के स्कूली बच्चों के दिमाग में डाला गया??

और आश्चर्य की बात ये है कि यही झूठा ज्ञान IAS  जैसे उच्च परीक्षाओं में भी पूछा जाता है अर्थात भारत में इतिहास के झूठ का बोलबाला पहली कक्षा से लेकर नौकरी के उच्चतम शिखर पर?

फिर सत्य प्रकट करेगा कौन??

1947 के बाद से अभी तक इस झूठ को प्रचारित,प्रसारित,प्रतिष्ठित करने का दोषी कौन ??

संज्ञान लीजिये!

जय श्री राम
⚔️🦁🚩

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