ईल्लु ३
इल्लुमिनाती का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षणयंत्र!
भाग-3
मित्रो भारत की स्कूली शिक्षा पहले 11वी तक थी तो 9वी में विशेष विषय हिन्दू विद्यार्थी चुनता था लेकिन अब ये कार्य 11वी में होता है 11वि में जो लोग जीव विज्ञान विषय लेते है उनको मेंढक चीरना पड़ता है प्रेक्टिकल के रूप में।
ऐसा क्यों??
सीधी बात है 11,12 कक्षा का जीव विज्ञान का हर विद्यार्थी डाक्टर नही बन सकता है क्योकि 1 लाख विद्यार्थी PMT परिक्षा में बैठते तो सेलेक्ट केवल 228 होते है क्योंकि मेडिकल कालेज में सीट ही इतनी होती है!
अब ज़िंदा मेंढक सभी से चिरवाना क्या हर जीव विज्ञान के विद्यार्थी को अनिवार्य है 11वी,12 वी में??
षड्यंत्र क्या है इसके पीछे देखिए!
ये स्पष्ट बात है कि भारत में ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र
इन चार वर्णो में 1947 में ब्राह्मण,वैश्य का मांसाहारी होना असम्भव जैसा था।
ये भी आवश्यक नही था कि प्रत्येक क्षत्रिय या प्रत्येक श्रमिक(शूद्र )भी मांसाहार करे।
मात्र क्षत्रियो में युद्ध कर पाने,खून खराबा देख पाने की क्षमता विकसित करने हेतु बलि प्रथा एव मांसाहार उनके यहाँ वर्जित नहीं था किंतु अनिवार्य भी नहीं है।
अंग्रेजो ने प्रयास किया कि ब्राह्मण,वैश्य,जैन आदि समस्त शाकाहारी लोग मेडिकल चिकित्सा विज्ञान से दूर रहे और ये तभी संभव था जब उनके पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से हिंसा का समावेश किया जाए इसलिये ये मेंढक चीरने वाला प्रेक्टिकल रखा गया जबकि ऐसे प्रैक्टिकल आयुर्वेद में नही हैं।
यदि शाकाहारी हिन्दू बालक बालिका स्कूल में इस पाठ्यक्रम से दूर रहता (उनकी योजना, कल्पना अनुसार) तो फिर कौन पढता मेडिकल साइंस इस्लामिक विद्यार्थी?
अब इस तरह से मुख्यत: बांटो और राज करो नीति के आधार पर कार्य करने वाले इल्लु गुलाम अंग्रेजो के लिये 1947 के बाद चिकित्सा पद्धति में करोड़ो षड्यंत्रकारी कार्य करना आसान हो गए।
आप स्वयं देखिए अब भारत में विदेशी बहुराष्ट्रीय दवाई कम्पनियो के हाथों सारे बड़े बड़े अस्पताल,बीमारियां, जांचे,अंग रिप्लेसमेंट आदि के कार्य बिक ही चुके है और भारत का हिन्दू इनकी ही दी गई बीमारी से इनसे ही इलाज करवा रहा है अर्थात षणयंत्र सफल हुआ।
संज्ञानात्मक।
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
भाग-3
मित्रो भारत की स्कूली शिक्षा पहले 11वी तक थी तो 9वी में विशेष विषय हिन्दू विद्यार्थी चुनता था लेकिन अब ये कार्य 11वी में होता है 11वि में जो लोग जीव विज्ञान विषय लेते है उनको मेंढक चीरना पड़ता है प्रेक्टिकल के रूप में।
ऐसा क्यों??
सीधी बात है 11,12 कक्षा का जीव विज्ञान का हर विद्यार्थी डाक्टर नही बन सकता है क्योकि 1 लाख विद्यार्थी PMT परिक्षा में बैठते तो सेलेक्ट केवल 228 होते है क्योंकि मेडिकल कालेज में सीट ही इतनी होती है!
अब ज़िंदा मेंढक सभी से चिरवाना क्या हर जीव विज्ञान के विद्यार्थी को अनिवार्य है 11वी,12 वी में??
षड्यंत्र क्या है इसके पीछे देखिए!
ये स्पष्ट बात है कि भारत में ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र
इन चार वर्णो में 1947 में ब्राह्मण,वैश्य का मांसाहारी होना असम्भव जैसा था।
ये भी आवश्यक नही था कि प्रत्येक क्षत्रिय या प्रत्येक श्रमिक(शूद्र )भी मांसाहार करे।
मात्र क्षत्रियो में युद्ध कर पाने,खून खराबा देख पाने की क्षमता विकसित करने हेतु बलि प्रथा एव मांसाहार उनके यहाँ वर्जित नहीं था किंतु अनिवार्य भी नहीं है।
अंग्रेजो ने प्रयास किया कि ब्राह्मण,वैश्य,जैन आदि समस्त शाकाहारी लोग मेडिकल चिकित्सा विज्ञान से दूर रहे और ये तभी संभव था जब उनके पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से हिंसा का समावेश किया जाए इसलिये ये मेंढक चीरने वाला प्रेक्टिकल रखा गया जबकि ऐसे प्रैक्टिकल आयुर्वेद में नही हैं।
यदि शाकाहारी हिन्दू बालक बालिका स्कूल में इस पाठ्यक्रम से दूर रहता (उनकी योजना, कल्पना अनुसार) तो फिर कौन पढता मेडिकल साइंस इस्लामिक विद्यार्थी?
अब इस तरह से मुख्यत: बांटो और राज करो नीति के आधार पर कार्य करने वाले इल्लु गुलाम अंग्रेजो के लिये 1947 के बाद चिकित्सा पद्धति में करोड़ो षड्यंत्रकारी कार्य करना आसान हो गए।
आप स्वयं देखिए अब भारत में विदेशी बहुराष्ट्रीय दवाई कम्पनियो के हाथों सारे बड़े बड़े अस्पताल,बीमारियां, जांचे,अंग रिप्लेसमेंट आदि के कार्य बिक ही चुके है और भारत का हिन्दू इनकी ही दी गई बीमारी से इनसे ही इलाज करवा रहा है अर्थात षणयंत्र सफल हुआ।
संज्ञानात्मक।
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
Comments
Post a Comment