ईल्लु २३
इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र!
भाग-23
टारगेट वर्ष 2090
मित्रो भारत में 1947 के बाद निजी शिक्षण संस्थान खुले तो हितकारिणी, जैन, सिख ट्रस्ट द्वारा खोले गए और अग्रसेन महाविद्यालय, तीर्थंकर यूनिवर्सिटी , सरस्वती शिशु मंदिर, महर्षि विद्या मंदिर आदि नाम से खोले गए।
फिर बाद में सेठ लोग अपने माता पिता के नाम से स्कुल कालेज खोलने लगे जैसे स्व श्री बद्री सिंह जूनियर हाई स्कूल,ईश्वरदीन PG कॉलेज,देवी देवताओ,प्राचीन ऋषियो, माता पिता के नाम पर हिन्दू ( सनातनी,जैन,सिख,बौद्ध ) वर्ग समस्त शैक्षणिक, सामाजिक, धार्मिक कार्य करता है किंतु आपको आश्चर्य नहीं होता कि इसाई स्कुल केवल इसाई मरे हुवे विदेशी पॉप के नाम से ही क्यों खोले जा रहे है?
पिछले 100 वर्षों में इस नामकरण पद्धति में बिल्कुल भी बदलाव क्यों नही हुआ ??
एक बात हमेशा ध्यान रखिए कि किसी संस्कृति के विनाश हेतु इल्लु 100 वर्षो की दीर्घकालीन योजना बनाता है फिर उनके वंशज इस योजना पर कार्य करते जाते है तो इल्लु ने पहचाना कि गुरुकुल ही इस देश की भौतिक समृद्धि ,ज्ञान के आधार है तो 1858 से ही गाँव गाँव घूमकर गुरुकुल नष्ट कर दिये गए।
ये गुरुकुल प्राचीन ऋषियो के नाम पर चलते आ रहे थे फिर मिशनरियों ने स्कूल कालेज खोलने आरम्भ किये और केवल विदेशी इसाई पॉप के नाम पर अब इसाई स्कूल में पढ़ने वाले बालक 4 साल की उम्र से ईसा मसीह और विदेशी इसाई पॉप का नाम जानने लग जाते है जिस स्कूल में वो पढ़ते है और उसी पॉप का फर्जी जन्मदिवस या स्मृतिदिवस अब मनाया जाने लगा है इन स्कूलों में ( रोज अखबार पढ़िए ध्यान से )
अब वर्ष 2019 तक 25 साल जिनकी उम्र है ऐसे युवक युवतियों की एक पीढ़ी तैयार हो चुकी है जो रोज डे, वेलेंटाइन डे, फ्रेंडशिप डे ये डे वो डे आदि मनाते है ये प्रथम चरण था सनातन धर्म विध्वंश का अब इसाई पॉप का जन्मदिन मनाना दूसरा चरण आरम्भ किया है इन जियोनिस्ट मिशनरियों ने।
अभी ये स्कूल स्तर पर है ( जैसे ऊपर लिखे डे की शुरुआत इसाई स्कूलों से हुई ) और जब ये वर्तमान स्कूली पीढ़ी 25 वर्ष की उम्र की हो जायेगी 2040 तक तो इसाई पॉप के जन्मदिन फिर सामाजिक स्तर पर मनाए जाने लगेंगे ( जैसे ऊपर लिखे डे अब सामाजिक स्तर पर व्यापक हो गए) ये तीसरा चरण होगा।
(ध्यान दीजिए संत रविदास जी की जगह अब अम्बेडकर की मूर्ति ने ले ली है ये उदाहरण है बदलाव प्रक्रिया का)
और फिर चौथा चरण आरम्भ होगा जिसमें इन इसाई विदेशी पॉप को ही भारत देश का उद्धारक, भारत देश का ऋषि बताया जाएगा और फिर नेहरू की किताब डिस्कवरी आफ इंडिया का उदाहरण देते हुए बताया जाएगा कि सेंट पाल,सेंट ऑगस्टिन,सेंट लूथर आपके (हिन्दू के) ही पूर्वज थे।
क्योंकि नेहरू की किताब के अनुसार (और स्कूल के पाठ्यक्रम में पाश्चात्य विद्वानों के अनुसार)आर्य यूरोप से भारत आये थे ये कार्य 2075 में आरम्भ होगा और हिन्दू लोग मानेंगे भी क्योंकि इस समय तक इसाई स्कूलों से पढ़कर निकले लोग हर गांव में होंगे बच्चे से लेकर बूढ़े तक इसाई स्कूल उत्पाद जिस बच्चे का जन्म 2019 में हुआ है वो बचपन 4 साल से ही इसाई डे मनाएगा स्कुल में इसाई पॉप के जन्मदिन मनाएगा तो 2079 तक यही आदमी 60 वर्ष का होगा और इसके नाती पोते भी वही करेंगे जो दादाजी बताएंगे,सिखाएंगे बस नाम के हिन्दू दादाजी वही बता पाएंगे जोकि स्कुल में सीखा होगा क्योंकि धर्म के नाम पर वो सेकुलर हो चुके होंग यानी धर्मविहीन!
और इस तरह वर्ष 2090 तक इस भारत देश में हिन्दू ऋषियो की जगह इसाई ऋषि ही असली आर्यवंशी के रूप में प्रसिद्ध होंगे माने जाएंगे क्योंकि असली प्राचीन ऋषियो के ग्रन्थ गायब हो चुके होंगे सेकुलरवाद के नाम गीता प्रेस जैसे संस्थान बन्द किये जा चुके होंगे।
(हंस,दिनमान,ब्लिट्ज,धर्मयुग पत्रिकाएं कैसे बन्द हुई? )
और उपलब्ध ग्रंथो या ऋषियो, देवी देवताओ के नाम को विभिन्न प्राचीन उदाहरणों प्रसंगों द्वारा बदनाम किया जा चुका होगा वर्तमान में शोशल मिडिया पर ये कार्य आरम्भ हो चुका है और इनके संरक्षण के लिये नेहरू ने संविधान में अभिव्यक्ति के अधिकार का कानून बना दिया था इलु योजना का एक चरण, जोकि केवल हिन्दू धर्म की निंदा पर ही लागू होता आया है 1950 से अभी ओवेसी, जाकिर नाइक, पश्चिम बंगाल के बशीरहाट की घटना तक
और मित्रो नेहरू को यूहीं कश्मिरी ब्राह्मण नही बताया गया।
नेहरू से यूँ ही डिस्कवरी आफ इंडिया नही लिखवाई गई!
इस किताब के ऊपर 1990 में यूही धारावाहिक नही बनाया गया सब 100 वर्षीय व्यापक योजना का एक हिस्सा है ताकि 2090 में प्रमाण के रूप ये बताया जा सके कि कश्यप ऋषि के वंसज कश्मीरी ब्राह्मण नेहरू ने ये स्वयं प्रकट होकर बताया था कि आर्य कौन थे।
तो हिन्दुओ अपने बच्चों को अभी से प्रतिदिन अपने धर्म, अपने ऋषियो,अपनी संस्कृति,अपने वेद पुराण के विषय में बताये और प्रत्येक पुराण में लिखे अंतरिक्ष अध्याय,जम्बूद्वीप वर्णन और ब्रह्मा के वंश का वर्णन वाला आध्याय अवश्य पढ़ने को दे ताकि वो जान सके कि आज जो ज्ञान,धर्म दिख रहा है भारत में वो मेरे प्राचीन ऋषियो के कारण ही है और मैं ही ब्रह्मा जी का वंशज हूँ!
पदम् पुराण में उपर्युक्त तीन अध्याय अवश्य पढिये गीता प्रेस गोरखपुर की पुराण पुस्तके।
(गूगल से pdf डाऊनलोड करके पढ़िए!
ध्यान रहे जिनमे गन्दे भाष्य हों उन्हें कतई न पढ़े ये भी षणयंत्र है)
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
भाग-23
टारगेट वर्ष 2090
मित्रो भारत में 1947 के बाद निजी शिक्षण संस्थान खुले तो हितकारिणी, जैन, सिख ट्रस्ट द्वारा खोले गए और अग्रसेन महाविद्यालय, तीर्थंकर यूनिवर्सिटी , सरस्वती शिशु मंदिर, महर्षि विद्या मंदिर आदि नाम से खोले गए।
फिर बाद में सेठ लोग अपने माता पिता के नाम से स्कुल कालेज खोलने लगे जैसे स्व श्री बद्री सिंह जूनियर हाई स्कूल,ईश्वरदीन PG कॉलेज,देवी देवताओ,प्राचीन ऋषियो, माता पिता के नाम पर हिन्दू ( सनातनी,जैन,सिख,बौद्ध ) वर्ग समस्त शैक्षणिक, सामाजिक, धार्मिक कार्य करता है किंतु आपको आश्चर्य नहीं होता कि इसाई स्कुल केवल इसाई मरे हुवे विदेशी पॉप के नाम से ही क्यों खोले जा रहे है?
पिछले 100 वर्षों में इस नामकरण पद्धति में बिल्कुल भी बदलाव क्यों नही हुआ ??
एक बात हमेशा ध्यान रखिए कि किसी संस्कृति के विनाश हेतु इल्लु 100 वर्षो की दीर्घकालीन योजना बनाता है फिर उनके वंशज इस योजना पर कार्य करते जाते है तो इल्लु ने पहचाना कि गुरुकुल ही इस देश की भौतिक समृद्धि ,ज्ञान के आधार है तो 1858 से ही गाँव गाँव घूमकर गुरुकुल नष्ट कर दिये गए।
ये गुरुकुल प्राचीन ऋषियो के नाम पर चलते आ रहे थे फिर मिशनरियों ने स्कूल कालेज खोलने आरम्भ किये और केवल विदेशी इसाई पॉप के नाम पर अब इसाई स्कूल में पढ़ने वाले बालक 4 साल की उम्र से ईसा मसीह और विदेशी इसाई पॉप का नाम जानने लग जाते है जिस स्कूल में वो पढ़ते है और उसी पॉप का फर्जी जन्मदिवस या स्मृतिदिवस अब मनाया जाने लगा है इन स्कूलों में ( रोज अखबार पढ़िए ध्यान से )
अब वर्ष 2019 तक 25 साल जिनकी उम्र है ऐसे युवक युवतियों की एक पीढ़ी तैयार हो चुकी है जो रोज डे, वेलेंटाइन डे, फ्रेंडशिप डे ये डे वो डे आदि मनाते है ये प्रथम चरण था सनातन धर्म विध्वंश का अब इसाई पॉप का जन्मदिन मनाना दूसरा चरण आरम्भ किया है इन जियोनिस्ट मिशनरियों ने।
अभी ये स्कूल स्तर पर है ( जैसे ऊपर लिखे डे की शुरुआत इसाई स्कूलों से हुई ) और जब ये वर्तमान स्कूली पीढ़ी 25 वर्ष की उम्र की हो जायेगी 2040 तक तो इसाई पॉप के जन्मदिन फिर सामाजिक स्तर पर मनाए जाने लगेंगे ( जैसे ऊपर लिखे डे अब सामाजिक स्तर पर व्यापक हो गए) ये तीसरा चरण होगा।
(ध्यान दीजिए संत रविदास जी की जगह अब अम्बेडकर की मूर्ति ने ले ली है ये उदाहरण है बदलाव प्रक्रिया का)
और फिर चौथा चरण आरम्भ होगा जिसमें इन इसाई विदेशी पॉप को ही भारत देश का उद्धारक, भारत देश का ऋषि बताया जाएगा और फिर नेहरू की किताब डिस्कवरी आफ इंडिया का उदाहरण देते हुए बताया जाएगा कि सेंट पाल,सेंट ऑगस्टिन,सेंट लूथर आपके (हिन्दू के) ही पूर्वज थे।
क्योंकि नेहरू की किताब के अनुसार (और स्कूल के पाठ्यक्रम में पाश्चात्य विद्वानों के अनुसार)आर्य यूरोप से भारत आये थे ये कार्य 2075 में आरम्भ होगा और हिन्दू लोग मानेंगे भी क्योंकि इस समय तक इसाई स्कूलों से पढ़कर निकले लोग हर गांव में होंगे बच्चे से लेकर बूढ़े तक इसाई स्कूल उत्पाद जिस बच्चे का जन्म 2019 में हुआ है वो बचपन 4 साल से ही इसाई डे मनाएगा स्कुल में इसाई पॉप के जन्मदिन मनाएगा तो 2079 तक यही आदमी 60 वर्ष का होगा और इसके नाती पोते भी वही करेंगे जो दादाजी बताएंगे,सिखाएंगे बस नाम के हिन्दू दादाजी वही बता पाएंगे जोकि स्कुल में सीखा होगा क्योंकि धर्म के नाम पर वो सेकुलर हो चुके होंग यानी धर्मविहीन!
और इस तरह वर्ष 2090 तक इस भारत देश में हिन्दू ऋषियो की जगह इसाई ऋषि ही असली आर्यवंशी के रूप में प्रसिद्ध होंगे माने जाएंगे क्योंकि असली प्राचीन ऋषियो के ग्रन्थ गायब हो चुके होंगे सेकुलरवाद के नाम गीता प्रेस जैसे संस्थान बन्द किये जा चुके होंगे।
(हंस,दिनमान,ब्लिट्ज,धर्मयुग पत्रिकाएं कैसे बन्द हुई? )
और उपलब्ध ग्रंथो या ऋषियो, देवी देवताओ के नाम को विभिन्न प्राचीन उदाहरणों प्रसंगों द्वारा बदनाम किया जा चुका होगा वर्तमान में शोशल मिडिया पर ये कार्य आरम्भ हो चुका है और इनके संरक्षण के लिये नेहरू ने संविधान में अभिव्यक्ति के अधिकार का कानून बना दिया था इलु योजना का एक चरण, जोकि केवल हिन्दू धर्म की निंदा पर ही लागू होता आया है 1950 से अभी ओवेसी, जाकिर नाइक, पश्चिम बंगाल के बशीरहाट की घटना तक
और मित्रो नेहरू को यूहीं कश्मिरी ब्राह्मण नही बताया गया।
नेहरू से यूँ ही डिस्कवरी आफ इंडिया नही लिखवाई गई!
इस किताब के ऊपर 1990 में यूही धारावाहिक नही बनाया गया सब 100 वर्षीय व्यापक योजना का एक हिस्सा है ताकि 2090 में प्रमाण के रूप ये बताया जा सके कि कश्यप ऋषि के वंसज कश्मीरी ब्राह्मण नेहरू ने ये स्वयं प्रकट होकर बताया था कि आर्य कौन थे।
तो हिन्दुओ अपने बच्चों को अभी से प्रतिदिन अपने धर्म, अपने ऋषियो,अपनी संस्कृति,अपने वेद पुराण के विषय में बताये और प्रत्येक पुराण में लिखे अंतरिक्ष अध्याय,जम्बूद्वीप वर्णन और ब्रह्मा के वंश का वर्णन वाला आध्याय अवश्य पढ़ने को दे ताकि वो जान सके कि आज जो ज्ञान,धर्म दिख रहा है भारत में वो मेरे प्राचीन ऋषियो के कारण ही है और मैं ही ब्रह्मा जी का वंशज हूँ!
पदम् पुराण में उपर्युक्त तीन अध्याय अवश्य पढिये गीता प्रेस गोरखपुर की पुराण पुस्तके।
(गूगल से pdf डाऊनलोड करके पढ़िए!
ध्यान रहे जिनमे गन्दे भाष्य हों उन्हें कतई न पढ़े ये भी षणयंत्र है)
जय श्री राम
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