ईल्लु २
इल्लुमिनाति का भारत में शिक्षा व्यवस्था पर षडयंत्र
भाग-2
कक्षा 10 जीव विज्ञान चैप्टर 8 में यौन शिक्षा!
मित्रो शायद 1985 में स्कूलों में 11वि कक्षा के बाद 12 वि कक्षा को जोड़ा गया था इससे पहले केवल 11वि तक ही स्कूली पाठ्यक्रम होता था जिसमे कक्षा 9 से विज्ञान या आर्ट्स या कॉमर्स विषय चुनने पड़ते थे 12वि कक्षा होने के बाद विषय चुनने का कार्य 11वि से होने लगा।
फिर 1985 में ही कक्षा 10 में स्वास्थ्य जानकारी के नाम पर यौन शिक्षा का एक अध्याय,जीव विज्ञान विषय में चैप्टर 8 में पढ़ाया जाने लगा जिसमे महिला,पुरुष के गुप्त अंगो का सचित्र विवरण है।
अब सवाल ये है कि इसके सचित्र वर्णन के लिए कक्षा 10 ही क्यों चुनी गई ?
वैसे आप हमेशा देखते हैं की जैसे हमारे भारत देश में केवल सेटेलाइट के विषय में ही शोध होते है जबकि यूरोप के वैज्ञानिक ,मनुष्य की प्रतिदिन की प्रत्येक गतिविधि पर रिसर्च करते है सुबह जागने से लेकर सोने तक और सोने के बाद भी!
तो यूरोप के वैज्ञानिकों ने रिसर्च की और पाया कि 15-16 वर्ष की उम्र लड़के लड़कियों में अत्यंत संवेदनशीलता होती है जिज्ञासु प्रवृत्ति होती है शारीरिक परिवर्तन होने लगते है।
विशिष्ट हारमोन का उत्पादन होता है इसलिये इस उम्र में दूसरे लिंगी के प्रति आकर्षण स्वयम उत्पन्न होता है क्योंकि हारमोन का निकलना अभी आरम्भ हुआ होता है,इसलिये विशिष्ट उत्तेजना इसी उम्र में उत्पन्न होती है।
चुकी इस उम्र में भारत के पारिवारिक रूप से संस्कारित लड़के लडकियां विपरीत योनि की तरफ आकर्षित होते हैं और अपनी ऊर्जा और बुद्धि पढ़ाई खेल की बजाय सेक्सुअल बातो में लगाने लगे इसलिये इल्लु के इशारे पर भारत में कक्षा 10वी में ये अध्याय रखे गए ताकि भारत की युवा पीढ़ी भटकने लग जाए और भारत का भविष्य बर्बाद हो और अब ये बरबादी खूब देखने को मिल रही है।
साथ ही इन कक्षाओ में एड्स की चर्चा की जाती है तो भारत में क्या 10 वी के बच्चों को एड्स होता है?
या होने की संभावना है?
क्या ये पाठ 12 वी की कक्षा या 6वि कक्षा में नहीं रखा जा सकता था?
क्या ये पाठ लड़कियों को अलग से महिला अंगो की जानकारी देना लड़को को अलग से पुरुष अंगो की जानकारी देने का कार्य नही हो सकता था?
सर्वजनिक किताब में पुरुष महिला के गुप्त अंगो के चित्र क्यों ???
स्वास्थ्य रक्षा का अध्याय यदि रखना था तो क्यों सर्दी जुकाम,बुखार,आँखों,पेट के रोगों का अध्याय नही रखा गया जबकि ये रोग हर घर में होते है और आयुर्वेद,घरेलु औषधियों के मॉध्यम से ठीक किये जा सकते है!
गाय के दूध, घी, भोजन,हल्दी, जीरा,अजवायन, गुड़, मिश्री, ब्राह्मी, नीबू आदि के विषय में स्कुल में कोई अध्याय नही है जबकि समुद्र के अंदर पाये जाने वाले जीवो, वृक्ष के हर भाग का विशिष्ट वर्णन है जोकि प्रतिदिन के जीवन में किसी लाभ का ज्ञान नहीं है।
गायब जो है वो है चरक,शुश्रुत ,धन्वंतरि,नागार्जुन, वाग्भट्ट आदि के महान आविष्कार!
पहचानिये कौन है वो लोग जो देश की शिक्षा पद्धति को भारतीय संस्कृति के विपरीत ले जा चुके आजादी के बाद से ही?
संज्ञानात्मक!
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
भाग-2
कक्षा 10 जीव विज्ञान चैप्टर 8 में यौन शिक्षा!
मित्रो शायद 1985 में स्कूलों में 11वि कक्षा के बाद 12 वि कक्षा को जोड़ा गया था इससे पहले केवल 11वि तक ही स्कूली पाठ्यक्रम होता था जिसमे कक्षा 9 से विज्ञान या आर्ट्स या कॉमर्स विषय चुनने पड़ते थे 12वि कक्षा होने के बाद विषय चुनने का कार्य 11वि से होने लगा।
फिर 1985 में ही कक्षा 10 में स्वास्थ्य जानकारी के नाम पर यौन शिक्षा का एक अध्याय,जीव विज्ञान विषय में चैप्टर 8 में पढ़ाया जाने लगा जिसमे महिला,पुरुष के गुप्त अंगो का सचित्र विवरण है।
अब सवाल ये है कि इसके सचित्र वर्णन के लिए कक्षा 10 ही क्यों चुनी गई ?
वैसे आप हमेशा देखते हैं की जैसे हमारे भारत देश में केवल सेटेलाइट के विषय में ही शोध होते है जबकि यूरोप के वैज्ञानिक ,मनुष्य की प्रतिदिन की प्रत्येक गतिविधि पर रिसर्च करते है सुबह जागने से लेकर सोने तक और सोने के बाद भी!
तो यूरोप के वैज्ञानिकों ने रिसर्च की और पाया कि 15-16 वर्ष की उम्र लड़के लड़कियों में अत्यंत संवेदनशीलता होती है जिज्ञासु प्रवृत्ति होती है शारीरिक परिवर्तन होने लगते है।
विशिष्ट हारमोन का उत्पादन होता है इसलिये इस उम्र में दूसरे लिंगी के प्रति आकर्षण स्वयम उत्पन्न होता है क्योंकि हारमोन का निकलना अभी आरम्भ हुआ होता है,इसलिये विशिष्ट उत्तेजना इसी उम्र में उत्पन्न होती है।
चुकी इस उम्र में भारत के पारिवारिक रूप से संस्कारित लड़के लडकियां विपरीत योनि की तरफ आकर्षित होते हैं और अपनी ऊर्जा और बुद्धि पढ़ाई खेल की बजाय सेक्सुअल बातो में लगाने लगे इसलिये इल्लु के इशारे पर भारत में कक्षा 10वी में ये अध्याय रखे गए ताकि भारत की युवा पीढ़ी भटकने लग जाए और भारत का भविष्य बर्बाद हो और अब ये बरबादी खूब देखने को मिल रही है।
साथ ही इन कक्षाओ में एड्स की चर्चा की जाती है तो भारत में क्या 10 वी के बच्चों को एड्स होता है?
या होने की संभावना है?
क्या ये पाठ 12 वी की कक्षा या 6वि कक्षा में नहीं रखा जा सकता था?
क्या ये पाठ लड़कियों को अलग से महिला अंगो की जानकारी देना लड़को को अलग से पुरुष अंगो की जानकारी देने का कार्य नही हो सकता था?
सर्वजनिक किताब में पुरुष महिला के गुप्त अंगो के चित्र क्यों ???
स्वास्थ्य रक्षा का अध्याय यदि रखना था तो क्यों सर्दी जुकाम,बुखार,आँखों,पेट के रोगों का अध्याय नही रखा गया जबकि ये रोग हर घर में होते है और आयुर्वेद,घरेलु औषधियों के मॉध्यम से ठीक किये जा सकते है!
गाय के दूध, घी, भोजन,हल्दी, जीरा,अजवायन, गुड़, मिश्री, ब्राह्मी, नीबू आदि के विषय में स्कुल में कोई अध्याय नही है जबकि समुद्र के अंदर पाये जाने वाले जीवो, वृक्ष के हर भाग का विशिष्ट वर्णन है जोकि प्रतिदिन के जीवन में किसी लाभ का ज्ञान नहीं है।
गायब जो है वो है चरक,शुश्रुत ,धन्वंतरि,नागार्जुन, वाग्भट्ट आदि के महान आविष्कार!
पहचानिये कौन है वो लोग जो देश की शिक्षा पद्धति को भारतीय संस्कृति के विपरीत ले जा चुके आजादी के बाद से ही?
संज्ञानात्मक!
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
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