ईल्लु १५
इल्लुमिनाति का भारत मे शिक्षा व्यवस्था पर षड्यंत्र
भाग-15
गुरु पूर्णिमा Vs शिक्षक दिवस
भारत में हिन्दुओ के विभिन्न पर्व,त्योहारों के विरुद्ध इल्लु छिपे रूप में बहुत परिश्रम कर रहा है ताकि ये त्योहार हमारे परम्पराओ से विलोपित होते जाए या फिर ऐसा प्रचार किया गया मीडिया के मॉध्यम से कि हिन्दू स्वयं अपने त्योहारों का विरोध करे।
जैसे होली पर रंग,दिवाली पर पटाखे ,संक्रांति पर पतंग का आदि!
इसी प्रकार गुरु पूर्णिमा को हिन्दू (सनातन, जैन,सिख,बौद्ध) अपने गुरुजनों के चरणों में सर नवाते है और इस सर नवाने में प्राचीन ऋषि परम्परा, गुरुकुल परम्परा जीवित हो जाती है शास्त्र जीवित हो जाते है धर्म प्रतिष्ठित हो जाता है जिसका असर शेष 364 दिन तक रहता है।
तो गुरु पूर्णिमा का महत्व कम करने के लिये-
1.1991 में केबल टीवी चैनल आरम्भ हुए और वर्ष 2000 तक जब ये गाँव तंक पहुच गये तब 2001 से हिन्दू संतो का टीवी पर निरादर आरम्भ हुआ ध्यान दीजिए केवल उन संतो का निरादर हुआ जो कि हिन्दू धर्म को प्रतिष्ठित करने में लगे रहे।
कांग्रेज़ के हित में काम करने वाले या हिन्दुओ को भ्रमित करने वाले चंद्रास्वामी जैसे ढोंगी का विरोध कभी नही हुआ राधे माँ,महामंडलेश्वर अधोक्षणान्द आदि की खोजबीन,प्रमोद कृष्णन,अग्निवेश पाखण्डी का निरादर टीवी पर कभी नही किया।
किंतु हिन्दू धर्म के प्रति हिन्दुओ के भले के लिये काम करने वाले द्वारिका शंकराचार्य जी,श्रृंगेरी शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी,पश्चिम यूरोप की इसाई धर्म-बाइबल-फ्रायड की जड़ उखाड़ने वाले रजनीश।
जंगलो में वनवासी बच्चों के लिये स्कुल खोलने वाले -हिन्दू गरीबो के लिये कुटीर उद्योग स्थापित करने वाले आसाराम बापू,कुछ प्रयत्न महाराज विद्यासागर के निरादर के लिये 2004 में हुआ पर 2 दिन की खबरों के बाद ही दब गया था।
गुरु पूर्णिमा, जिस दिन पुरे भारत में विद्यार्थियो को शिक्षक के चरण छूना चाहिए था उस दिन को त्यौहार के रूप में बनाने की बजाय डा राधाकृष्णन के नाम पर शिक्षक दिवस मनाना आरम्भ किया।
जबकि शिक्षा क्षेत्र में इनका कोई योगदान नहीं था और इनके ऊपर आरोप भी लगा था की अपने ही छात्र की पीएचडी को कॉपी करके पहले स्वयं डॉक्टरेट की डिग्री हासिल कर ली थी।
यदि तत्कालीन किसी गुरु,शिक्षक के नाम पर शिक्षक दिवस मनाना था तो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय जी के नाम पर क्यों नहीं?
गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक स्वामी श्रधानन्द जी के नाम पर क्यों नहीं?
आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों के प्रेरक जगदीश चंद्र बासु, डा रमन या डा होमी जहांगीर भाभा के नाम पर क्यों नहीं?
प्रथम आधुनिक विमान के अंतराष्ट्रीय वैदिक वैज्ञानिक शिवकर बापू जी तलपड़े के नाम पर क्यो नही?
पूना के 2 आयुर्वेदिक प्लास्टिक सर्जनों के नाम पर क्यों नहीं ?
वो इसलिये नही क्योंकि इन महत्वपूर्ण लोगो में से किसी एक के भी नाम से शिक्षक दिवस या गुरु दिवस होता तो हर विद्यार्थी इनके विषय में जानने का प्रयत्न करता और भारत के प्राचीन धर्म ग्रंथों, वेदो,पुराण आदि की तरफ आकर्षित होता।
और हां ऊपर जितने भी नाम लिखे है उनमें से प्रत्येक के सामने डा राजेंद्र प्रसाद एक साधारण व्यक्ति ही थे तो फिर उनके नाम से स्कूलों में गुरु दिवस शिक्षक दिवस क्यों नही मनाया जाता??
किसके इशारे पर हिन्दू श्रेष्ठ वैज्ञानिकों की अनदेखी और एक साधारण चोर कांग्रेसी को जबरदस्ती पुरे भारत के स्कूलों का गुरु बना दिया गया??
मित्रो इस तरह गुरु पूर्णिमा को शासकीय रूप से उपेक्षित कर दिया गया जिसको एक राष्ट्रीय त्यौहार होना था उसको मात्र हिन्दू त्यौहार ही रहने दिया और हर बार नई पीढ़ी के बच्चे इससे दूर होते जा रहे हैं।
बिना इसका महत्व समझे और इस तरह प्राचीन ऋषियो का नाम,प्राचीन ग्रंथ, प्राचीन चरण स्पर्श परम्परा को एक झटके में नेहरू ने विलोपित करवा दिया।
किसके इसारे पर?
संज्ञान लीजिए
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
भाग-15
गुरु पूर्णिमा Vs शिक्षक दिवस
भारत में हिन्दुओ के विभिन्न पर्व,त्योहारों के विरुद्ध इल्लु छिपे रूप में बहुत परिश्रम कर रहा है ताकि ये त्योहार हमारे परम्पराओ से विलोपित होते जाए या फिर ऐसा प्रचार किया गया मीडिया के मॉध्यम से कि हिन्दू स्वयं अपने त्योहारों का विरोध करे।
जैसे होली पर रंग,दिवाली पर पटाखे ,संक्रांति पर पतंग का आदि!
इसी प्रकार गुरु पूर्णिमा को हिन्दू (सनातन, जैन,सिख,बौद्ध) अपने गुरुजनों के चरणों में सर नवाते है और इस सर नवाने में प्राचीन ऋषि परम्परा, गुरुकुल परम्परा जीवित हो जाती है शास्त्र जीवित हो जाते है धर्म प्रतिष्ठित हो जाता है जिसका असर शेष 364 दिन तक रहता है।
तो गुरु पूर्णिमा का महत्व कम करने के लिये-
1.1991 में केबल टीवी चैनल आरम्भ हुए और वर्ष 2000 तक जब ये गाँव तंक पहुच गये तब 2001 से हिन्दू संतो का टीवी पर निरादर आरम्भ हुआ ध्यान दीजिए केवल उन संतो का निरादर हुआ जो कि हिन्दू धर्म को प्रतिष्ठित करने में लगे रहे।
कांग्रेज़ के हित में काम करने वाले या हिन्दुओ को भ्रमित करने वाले चंद्रास्वामी जैसे ढोंगी का विरोध कभी नही हुआ राधे माँ,महामंडलेश्वर अधोक्षणान्द आदि की खोजबीन,प्रमोद कृष्णन,अग्निवेश पाखण्डी का निरादर टीवी पर कभी नही किया।
किंतु हिन्दू धर्म के प्रति हिन्दुओ के भले के लिये काम करने वाले द्वारिका शंकराचार्य जी,श्रृंगेरी शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी,पश्चिम यूरोप की इसाई धर्म-बाइबल-फ्रायड की जड़ उखाड़ने वाले रजनीश।
जंगलो में वनवासी बच्चों के लिये स्कुल खोलने वाले -हिन्दू गरीबो के लिये कुटीर उद्योग स्थापित करने वाले आसाराम बापू,कुछ प्रयत्न महाराज विद्यासागर के निरादर के लिये 2004 में हुआ पर 2 दिन की खबरों के बाद ही दब गया था।
गुरु पूर्णिमा, जिस दिन पुरे भारत में विद्यार्थियो को शिक्षक के चरण छूना चाहिए था उस दिन को त्यौहार के रूप में बनाने की बजाय डा राधाकृष्णन के नाम पर शिक्षक दिवस मनाना आरम्भ किया।
जबकि शिक्षा क्षेत्र में इनका कोई योगदान नहीं था और इनके ऊपर आरोप भी लगा था की अपने ही छात्र की पीएचडी को कॉपी करके पहले स्वयं डॉक्टरेट की डिग्री हासिल कर ली थी।
यदि तत्कालीन किसी गुरु,शिक्षक के नाम पर शिक्षक दिवस मनाना था तो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय जी के नाम पर क्यों नहीं?
गुरुकुल कांगड़ी के संस्थापक स्वामी श्रधानन्द जी के नाम पर क्यों नहीं?
आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों के प्रेरक जगदीश चंद्र बासु, डा रमन या डा होमी जहांगीर भाभा के नाम पर क्यों नहीं?
प्रथम आधुनिक विमान के अंतराष्ट्रीय वैदिक वैज्ञानिक शिवकर बापू जी तलपड़े के नाम पर क्यो नही?
पूना के 2 आयुर्वेदिक प्लास्टिक सर्जनों के नाम पर क्यों नहीं ?
वो इसलिये नही क्योंकि इन महत्वपूर्ण लोगो में से किसी एक के भी नाम से शिक्षक दिवस या गुरु दिवस होता तो हर विद्यार्थी इनके विषय में जानने का प्रयत्न करता और भारत के प्राचीन धर्म ग्रंथों, वेदो,पुराण आदि की तरफ आकर्षित होता।
और हां ऊपर जितने भी नाम लिखे है उनमें से प्रत्येक के सामने डा राजेंद्र प्रसाद एक साधारण व्यक्ति ही थे तो फिर उनके नाम से स्कूलों में गुरु दिवस शिक्षक दिवस क्यों नही मनाया जाता??
किसके इशारे पर हिन्दू श्रेष्ठ वैज्ञानिकों की अनदेखी और एक साधारण चोर कांग्रेसी को जबरदस्ती पुरे भारत के स्कूलों का गुरु बना दिया गया??
मित्रो इस तरह गुरु पूर्णिमा को शासकीय रूप से उपेक्षित कर दिया गया जिसको एक राष्ट्रीय त्यौहार होना था उसको मात्र हिन्दू त्यौहार ही रहने दिया और हर बार नई पीढ़ी के बच्चे इससे दूर होते जा रहे हैं।
बिना इसका महत्व समझे और इस तरह प्राचीन ऋषियो का नाम,प्राचीन ग्रंथ, प्राचीन चरण स्पर्श परम्परा को एक झटके में नेहरू ने विलोपित करवा दिया।
किसके इसारे पर?
संज्ञान लीजिए
जय श्री राम
⚔️🦁🚩
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